भारत की एनएसजी सदस्यता पर चीन ने फिर अटकाया रोड़ा

नई दिल्ली, 8 नवम्बर। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की इस हफ्ते विएना में होने वाली बैठक से पहले चीन ने आज कहा कि भारत की सदस्यता की दावेदारी को लेकर उसके रूख में ‘कोई परिवर्तनÓ नहीं हुआ है। वियना में होने वाली अहम बैठक से पहले चीन ने साफ कह दिया है कि या तो भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करे या फिर गैर एनपीटी सदस्यों की एंट्री पर जब तक आम राय नहीं बन जाती, वह अपना रुख नहीं बदलेगा। चीन ने संकेत दिया है कि गैर एनपीटी देशों के एंट्री को लेकर नियमों को इस समूह द्वारा अंतिम रूप देने के बाद ही इस बारे में विचार किया जाएगा
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, ‘इस शुक्रवार यानी को विएना में एनएसजी के पूर्ण सत्र का आयोजन होगा। फिलहाल हमारे रूख में कोई बदलाव नहीं है। लू ने भारत और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की 4 नवम्बर को हैदराबाद में हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि चीन भारत सहित संबंधित पक्षों के साथ नजदीकी सम्पर्क में है और इस मुद्दे पर रचनात्मक बातचीत चल रही है। एनएसए अजित डोभाल ने चीन के एनएसए और स्टेट काउंसिलर यांग जिएची के साथ हैदराबाद में बातचीत की थी जिसमें उन्होंनें एनएसजी का मुद्दा उठाया था।
यह वार्ता विएना में 11-12 नवम्बर को होने वाली 48 सदस्यीय एनएसजी की बैठक से पहले हुई। मीडिया की खबरों के मुताबिक उस बैठक में समूह उन नये सदस्यों को शामिल करने के दो चरणीय प्रक्रिया पर चर्चा कर सकता है जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले भारत और पाकिस्तान ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं। पिछले हफ्ते ही एनएसजी में एंट्री के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच दूसरे राउंड की बात हुई थी। इसके बाद चीन की तरफ से कहा गया था कि पहले वह एनपीटी पर साइन नहीं करने वाले सभी देशों की एंट्री के मुद्दे का समाधान चाहेगा। तब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, एनएसजी में भारत को शामिल करने के मामले पर मैं आपसे कह सकता हूं कि चीन का रुख बिल्कुल स्पष्ट और दृढ़ है। हम वैसा समाधान चाहेंगे जो सभी गैर एनपीटी देशों पर लागू हो और उसके बाद हम संबंधित गैर एनपीटी देश के विशिष्ट आवेदन पर चर्चा करेंगे। इस मुद्दे पर संयुक्त सचिव अमनदीप सिंह गिल और उनके चीनी समकक्ष वांग कुन के बीच यहां 31 अक्तूबर को हुई बातचीत के दौरान भी चर्चा हुई थी। वह बैठक डोभाल और यांग के बीच हैदराबाद में होने वाली बैठक से पहले हुई थी। चीन साथ ही पाकिस्तान के एनएसजी में प्रवेश को लेकर भी बातचीत कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जोर अब एनएसजी द्वारा काम किये जा रहे उस तौर तरीके पर है जो भारत को समायोजित कर सके। पाकिस्तान के विपरीत भारत के परमाणु अप्रसार के रिकार्ड को समूह के अधिकतर सदस्य सकारात्मक मानते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *