वे करें तो रासलीला

रोशनलाल शर्मा

बहुत हल्ला है, शहर में यूडी टैक्स जमा नहीं कराने वालों पर कार्रवाई का। उनके आधारभूत अधिकारों को ही निगम रोक देगा। मानवाधिकार आयोग ने भले ही सीवर लाइन कनेक्शन जाम करने की नगर निगम की धमकी पर प्रसंज्ञान ले लिया हो लेकिन नगर निगम के नए महापौर आमादा है, कैसे भी हो वसूली करके ही रहेंगे। लेकिन इससे अधिक मजेदारी वाली बात क्या होगी कि खुद महापौर अशोक लाहोटी महापौर बनने से पहले तक यूडी टैक्स के बकायादारों में शामिल थे। वे भाजपा के नेता थे। संगठन में पदाधिकारी भी थे और सबसे बड़ी बात भाजपा के पार्षद भी हैं। निर्मल नाहटा उनकी ही पार्टी के महापौर थे। वे सदन में पार्षद तो आज भी हैं सिर्फ महापौर का पद उनके नाम के आगे लग गया तो फिर परिस्थितियां ऐसे बदल जाती है क्याï? महापौर लाहोटी ने आज पूरे चमके के साथ अपना बकाया यूडी टैक्स नगर निगम में कैमरों की चिलचिलाहट के बीच 98 हजार 1 सौ 28 रुपए का चैक जमा करा दिया। क्यों? अब क्यों? बतौर भाजपा पार्षद उन्होंने यह कदम जयपुर शहर के हित में पहले क्यों नहीं उठाया। वे यूडी टैक्स वसूली पर सख्ती के अपने बयान के बाद ही क्यों जागे। क्या वे अब तक दोषी नहीं थे। क्या सबसे पहले उनका सीवर कनेक्शन बंद नहीं किया जाना चाहिए था। और इससे भी बड़ी बात। प्रदेश भाजपा कार्यालय का यूडी टैक्स करीब आठ लाख रुपए बकाया है। वह अब तक क्यों जमा नहीं हुआ। पिछले तीन साल से जयपुर में भाजपा का बोर्ड है, वे खुद पार्षद रहे, तो उनको भाजपा मुख्यालय का यूडी टैक्स क्यों नहीं याद आया। अगला नाम भी भाजपा का बड़ा नाम है। सवाई माधोपुर की विधायक दीया कुमारी का सिटी पैलेस म्यूजियम। इस पर 96 लाख 73 हजार का यूडी टैक्स बकाया है। मतलब करीब एक करोड़ रुपया। ये मोटी-मोटी सूची है। कांग्रेस मुख्यालय का यूडी टैक्स भी बकाया हो सकता है। आमजन के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ताधारी दल के इतने कद्दावर लोगों का ही अब तक टैक्स जमा नहीं हुआ है तो फिर जनता के सीवर कनेक्शन काटने की धमकी क्यों? वह भी उस स्थिति में जब सीवर का चार्ज उनसे लगातार वसूला जा रहा है। पानी के बिलों में यह राशि जुड़कर आ रही है। मतलब तो यही हुआ ना कि ‘वे करें तो रास लीला और हम करें तो करेक्टर ढीला।Ó

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