बड़ी खबर: बड़ा फैसला/ जिस घोटाले पर देश का सियासी चेहरा बदल गया, उस 2जी स्पेक्ट्रम मामले में आरोप ही साबित नहीं

बड़ी खबर: बड़ा फैसला/ जिस घोटाले पर देश का सियासी चेहरा बदल गया, उस 2जी स्पेक्ट्रम मामले में आरोप ही साबित नहीं

पूर्व मंत्री ए. राजा और कनीमोझी सहित 44 हुए बरी
सोर्स संचार माध्यम। जिस 2जी घोटाले को लेकर देश की सियासत का चेहरा बदल गया। वह घोटाला सरकार साबित ही नहीं कर पाई। गुरुवार को सीबीआई कोर्ट के आए फैसले में कहा गया है कि प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित ही नहीं कर पाया और इसी वजह से ए. राजा और कनिमोझाी जैसे यूपीए सरकार के मंत्रियों सहित 44 आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
2जी स्पैक्ट्रम घोटाला मामले में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने पूर्व मंत्री ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी समेत 44 आरोपियों और कई कंपनियों को बरी कर दिया। दो मामले सीबीआई के थे तो एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने दायर किया था। सीबीआई के स्पेशल जज ओपी सैनी ने ये फैसला दिया। 2जी केस के लिए सीबीआई का स्पेशल कोर्ट 14 मार्च 2011 को बनी थी। जज ने फैसले में कहा कि प्रॉसिक्यूशन कोई भी आरोप साबित करने में नाकाम रहा। लिहाजा सभी को बरी किया जाता है। एक लाख 76 हजार करोड़ के इस घोटाले में यूपीए सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर रहे ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी मुख्य आरोपी थे। 2010 में कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल रहे विनोद राय की रिपोर्ट में घोटाले का खुलासा हुआ था।
स्वान टेलीकॉम के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित करने में नाकाम रहा। सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। लॉस दिखाया गया था लेकिन असल में कोई नुकसान हुआ ही नहीं। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा, किसी भी बड़े मुकदमे में वक्त लगता है लेकिन सच्चाई सामने आ गई। मुकदमा चला तो कोई एविडेंस नहीं दिया गया। क्रिमिनल कोर्ट की अप्रोच के हिसाब से ये मुकदमा नहीं बनता।
गलत प्रचार का जवाब मिला, देश से माफी मांगें
फैसले पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा है कि मेरे खिलाफ जो प्रोपेगैंडा फैलाया गया था आज उसका जवाब मिला है। उधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस कोर्ट के फैसले को प्रशस्ति पत्र न समझे। कोर्ट के फैसले पर जांच एजेंसी गौर करेगी। सही तरीके से स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट होता तो सरकार को ज्यादा फायदा होता। नियम बदलकर पहले आओ, पहले पाओ पॉलिसी अपनाई गई। हमने नीलामी की तो ज्यादा पैसा मिला। कपिल सिब्बल ने कहा, मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। मैं कभी अपने बयान से नहीं पलटता। हम बेबुनियाद बातें नहीं करते। ये सब बीजेपी करती है। तब विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। आरोप लगाने वालों (विनोद राय) को देश से माफी मांगनी चाहिए। पूर्व मंत्री चिदंबरम ने कहा, कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि हमारी सरकार पर जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे साबित हुए।
कब सामने आया था?
2010 में कैग रहे विनोद राय की रिपोर्ट से घोटाला सामने आया था। 2जी मामले में ट्रायल 6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था। कोर्ट ने 17 आरोपियों के चार्ज तय किए थे। कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि 2जी स्पैक्ट्रम के अलॉटमेंट के लिए नीलामी नहीं की गई, इससे देश का नुकसान हुआ।
कौन-कौन थे मुख्य आरोपी?
ए. राजा, कनिमोझी, पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके चंदोलिया, स्वान के टेलीकॉम प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी के 3 टॉप एग्जीक्यूटिव- गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर। कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजीव अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी। एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि-अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास श्रॉफ। लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप इंडिया मोबाइल लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग लिमिटेड कंपनियां भी आरोपी थीं। ईडी की चार्जशीट में करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल को भी आरोपी बनाया गया था।
संसद में हंगाम
2जी के मसले पर गुरुवार को संसद में भी हंगामा हुआ। राज्यसभा में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिसके आधार पर हम वहां (सत्ता पक्ष) से यहां (विपक्ष) में आए, दरअसल वो घोटाला ही नहीं हुआ। सरकार बताए कि 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए कहां गए।

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