जब राजपूत संगठन भाजपा का समर्थन कर रहे थे, तब क्यों नहीं कहा वे सामाजिक रहें, राजनीतिक नहीं: खाचरियावास

जब राजपूत संगठन भाजपा का समर्थन कर रहे थे, तब क्यों नहीं कहा वे सामाजिक रहें, राजनीतिक नहीं: खाचरियावास

जयपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रतापसिंह खाचरियावास ने पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ पर करारा प्रहार किया। राठौड़ ने राजपूत समाज द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने के मुद्दे पर कल कल कहा था कि सामाजिक संगठनों को सामाजिक ही रहना चाहिए। खाचरियावास ने इस पर कहा कि राजपूत सभा, रावंणा राजपूत सभा, चारण सभा, करणी सेना, राष्ट्रीय करणी सेना, प्रताप फाउण्डेशन द्वारा राजस्थान के अजमेर, अलवर और मांडलगढ़ में हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिये जाने से बौखला कर भाजपा के नेता हताश और परेशान होकर बौखलाहट में जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। ये नेता उस वक्त कहां थे, जब आनन्दपाल एनकाउंटर के बाद सावराद गांव में श्रृद्धांजलि सभा में शतिपूर्वक ढंग से सभा कर रहे बेकसूर लोगों पर पुलिस गोलियां चला रही थी। भाजपा के सभी विधायक पार्टी करके उन गोलियों से मर रहे लोगों के प्रकरण में हंसी उड़ा रहे थे।

खाचरियावास ने कहा कि सावराद में श्रृद्धांजलि सभा के दौरान जब गोलियां चली तो सेना के सिपाही के बेटे सुरेन्द्र सिंह की मौत हो गई। हजारों नौजवान गोलियों और लाठीचार्ज में घायल हो गये। पुलिस ने 2000 से ज्यादा महंगी लक्जरी गाडिय़ां तोड़ दी। लगभग दो हजार बच्चों पर अलग-अलग थानों में मुकदमें दर्ज करा दिये गये। थानों में बंद किये गये नौजवानों के पुलिस ने हाथ तोड़ दिये। उन्हें बेदर्दी से पीटा गया। थानों में पुलिसकर्मियों ने जबरन उन्हें पेषाब पिलाने की कोशिश की। कोई इन पुलिसकर्मियों को रोकने के लिये आगे नहीं आया।

भाजपा में 24 राजपूत विधायक हैं, एक ने भी जुल्म के खिलाफ मुंह तक नहीं खोला। पंचायत राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ को यह बयान शोभा नहीं देता, जब वो यह कह रहे हैं कि सामाजिक संगठनों को सामाजिक कार्य करने चाहिये, राजनीति नहीं। यदि यह सामाजिक संगठन नहीं होते तो पुलिस के जुल्म को कौन रोकता? आज इन्हीं सामाजिक संगठनों के दबाव में उपचुनावों से डरकर भाजपा सरकार ने आनन्दपाल एनकाउंटर की सीबीआई जांच शुरू की है।
राजपूत संगठन शुरू से जब तक भाजपा का समर्थन कर रहे थे, तब तक वो सही थे, जैसे ही जुल्म, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ भाजपा को सबक सिखाने के लिये उन्होंने कांग्रेस का समर्थन किया, राजेन्द्र राठौ? और भाजपा को तकलीफ शुरू हो गई। यह तो षुरूआत है, आगे सभी जाति और धर्म के लोग भाजपा सरकार को सबक सिखाने के लिये तैयार बैठे हैं।
खाचरियावास ने कहा कि राजेन्द्र राठौड़ साहब को यह भी बताना चाहिए कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के हनुमान कहे जाने वाले पूर्व विदेश एवं रक्षामंत्री जसवंत सिंह जैसे वरिष्ठ भाजपा नेता का जब बाड़मेर से टिकट काटा गया, तब राठौड़ साहब नहीं बोले। आज भी जसवंत सिंह जी कोमा में है, लेकिन भाजपा नेताओं को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है। राजस्थान में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने वाले भाजपा के पितामह भैरोसिंह शेखावत का नाम लेने से भी भाजपा नेता कतराते हैं, उनके नाम से कोई भी योजना भाजपा सरकार ने राजस्थान में शुरू नहीं की। ऐसे में भाजपा सिर्फ राजपूत, रावंणा राजपूत, चारण सहित प्रदेश के अनेक जातियों के मतदाताओं को अपना परम्परागत वोट मानती है। अब जब यह परम्परागत वोट बैंक खिसक गया है तो भाजपा को जवाब देना चाहिये और जसवंत सिंह के अपमान, सावराद प्रकरण, चतुरसिंह हत्याकाण्ड के लिये भाजपा को माफी मांगनी चाहिये और सामाजिक संगठनों को चुनौती देकर उनके खिलाफ बयानबाजी देना बंद करना चाहिये अन्यथा इस बयानबाजी से भाजपा को और बड़े नुकसान के लिये तैयार रहना पड़ेगा।
खाचरियावास ने कहा कि भंवर जितेन्द्र सिंह कांग्रेस में टिकट बांटने की हैसियत रखते हैं, कांग्रेस में उनका बड़ा सम्मान है। उनकी सिफारिश पर ही अलवर से डॉ. करणसिंह को टिकट दिया गया हैै। राठौड़ को यह बताना चाहिये कि बूंदी में अभी कुछ दिन पूर्व भंवर जितेन्द्र सिंह के खिलाफ राज्य की भाजपा सरकार के इशारे पर झूठे मुकदमें दर्ज किये गये हैं, उसके पीछे सरकार की क्या मंशा है?

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