रानी पद्मिनी पर बनी फिल्म का विवाद चित्तौड़ में पर्यटन के लिए बना वरदान

रानी पद्मिनी पर बनी फिल्म का विवाद चित्तौड़ में पर्यटन के लिए बना वरदान

चित्तौडग़ढ़। रानी पद्मिनि पर संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई गई फिल्म पद्मावती का विवाद प्रदेश मेवाड़ क्षेत्र के पर्यटन के लिए वरदान साबित हुआ है। इस फिल्म पर रोक की वजह से पर्यटकों में क्यूरोसिटी बढ़ी है और बड़ी संख्या में रानी पद्मिनी के बारे में जानना चाहते हैं। पिछले बीस दिनों में चित्तौड़, उदयपुर और आसपास के इलाकों में स्थित पर्यटक स्थलों पर खासा राजस्व सरकार को मिला है।

संजय लीला भंसाली की फिल्म को लेकर विरोध के बाद बड़ी संख्या में लोग दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह और जनवरी के पहले सप्ताह में क्षेत्र के महत्वपूर्ण शहरों में घूमने आए हैं, जिसमें चित्तौडग़ढ़ और उदयपुर जैसे क्षेत्र हैं। हालांकि फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म पद्मावती का नाम बदलकर पद्मावत करने और कुछ बदलाव करने पर फिल्म को हरी झंडी दी है, जबकि राजपूत समाज इस नए रूप में बर्दाश्त नहीं करने की बात कह चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चित्तौडग़ढ़ में आने वाले पर्यटकों की संख्या में दोगुनी वृद्धि हुई है। दिसंबर 2017 में 81 हजार से अधिक पर्यटक आए, पिछले साल इसी दौरान करीब 41 हजार पर्यटक आए थे। पर्यटक रानी पद्मिनी से संबंधित स्थलों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। फिल्म पद्मावत को लेकर विवाद के कारण चित्तौड़ के किले को लोग देखना चाहते हैं। लोग यहां आकर गाइड्स से पद्मिनी, उनके पति रावल रतन सिंह और अलाउद्दीन से संबंधित किस्सों के बारे में पूछते हैं।

500 से ज्यादा इतिहासकार करेंगे पद्मावती के इतिहास पर मंथन
भारतीय इतिहास लेखन, वर्तमान परिदृश्य तथा संभावनाएं विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 19 जनवरी को राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर से 500 से ज्यादा इतिहासकार शिरकत करेंगे। संगोष्ठी में राजस्थान के लोक संतों, महाराणा प्रताप एवं पद्मावती (पद्मिनी) के इतिहास का पुनरीक्षण किया जाएगा।

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