अब कौन बनेगा यूआईटी चैयरमेन: राजनीतिक व जातिगत समीकरण के आधार पर होगा मनोनयन

अब कौन बनेगा यूआईटी चैयरमेन: राजनीतिक व जातिगत समीकरण के आधार पर होगा मनोनयन

चित्तौडग़ढ़ (विवेक वैश्णव)।

यूआईटी के चैयरमेन निर्मल काबरा के निधन के बाद रिक्त हुए पद पर अब कौन आसीन होगा इस बात को लेकर राजनीतिक हलकों में अब पुन: चर्चाएं प्रारंभ हो गई है। आगामी विधानसभा चुनाव एवं जातिगत समीकरण के आधार पर इस पद पर मनोनयन की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही है। यूआईटी के लिए पुन: प्रारंभ हुई इस दौड़ में सबसे आगे पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश झंवर को देखा जा रहा है।

राजस्थान में इसी वर्ष नवम्बर माह में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित है। निर्मल काबरा के निधन के बाद विगत दो दिन से यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि इस पद पर अब सरकार प्रशासक नियुक्त कर देगी। लेकिन चुनाव के मद्देनजर जातिगत समीकरण को साधने के लिए यह तो निश्चित माना जा रहा है कि किसी ना किसी को इस पद पर मनोनीत अवश्य किया जायेगा और यह भी तय माना जा रहा है कि इस पद पर वैश्य वर्ग से ही कोई मनोनीत होगा। यदि यह समीकरण सटीक बैठता है तो इस दौड़ में सबसे आगे सुरेश झंवर को माना जा रहा है। पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश झंवर के साथ ही अशोक अजमेरा, आई.एम.सेठिया, अनिल सिसोदिया तथा अनंत समदानी के नाम पर भी चर्चा की जा सकती है। उपरोक्त प्रमुख नामों में झंवर, सेठिया, सिसोदिया तथा समदानी को राजनीतिक अनुभव भी है।

झंवर पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके है और नगर विकास न्यास भी नगर निकाय की ही एक संस्था है। ऐसे में झंवर यूआईटी के एक अच्छे अध्यक्ष साबित हो सकते है। झंवर पूर्व में भाजपा के नगर अध्यक्ष भी रह चुके है और स्वयं उनकी कार्यकर्ताओं की एक टीम भी है। झंवर का समाज में वर्चस्व भी है और राजस्थान सरकार के यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी के भी विश्वस्त माने जाते है। झंवर ने पूर्व में नगर परिषद् में सभापति के लिए दावेदारी भी की थी लेकिन क्षेत्रीय विधायक बाद में सुशील शर्मा के नाम पर सर्वसम्मति बनाने में कामयाब रहे थे। तब से राजनीतिक हलके में उन्हें विधायक खेमे का विरोधी भी माना जा रहा था। मंत्री कृपलानी तथा सांसद सी.पी. जोशी की ओर से भी इस नाम पर कोई आपत्ति नहीं होने से यह भी संदेश जायेगा कि भाजपा एकजुट है और यहां किसी तरह का विवाद नहीं है।

यूआईटी चैयरमेन के लिए प्रबल अन्य दावेदारों में डॉ. आई.एम. सेठिया लंबे समय से संगठन में सक्रिय है और चित्तौडग़ढ़ अरबन को ऑपरेटिव बैंक के लंबे समय तक चैयरमेन भी रहे हैं। सेठिया अन्य सामाजिक संगठनों में भी लंबे समय से सक्रिय होने के साथ ही राश्ट्रीय स्तर तक भाजपा में अपनी एक पहचान रखते है। अनंत समदानी सहकार संघ के चैयरमेन रहने के नाते अपनी पहचान स्थापित कर चुके है। अनंत के पिता अरूण समदानी भी संगठन में कई वर्शो तक सक्रिय रहे थे तथा कई वर्शो तक वे भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे थे। अनंत स्वयं कई वर्शो से पार्टी में सक्रिय है तथा किसी भी गुटबाजी में भी षामिल नही रहे है। इनके अलावा अनिल सिसोदिया पूर्व में चित्तौडग़ढ़ भूमि विकास बैंक के चैयरमेन भी रह चुके हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यूआईटी चैयरमेन की नियुक्ति से आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरण को साधा जा सकता है।

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