गुजरात में राज्यपाल कोहली ने शुरू की जान बचाने की मुहिम की शुरुआत

गुजरात में राज्यपाल कोहली ने शुरू की जान बचाने की मुहिम की शुरुआत
टीम जयपुर ने बनाया है परिवार की सेफ्टी का एप मेरा पेशेंट
 
गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने मेरा पेशेंट एप  की जान बचाने की मुहिम आई प्लेज टू रेस्क्यू कैंपेन का शुभारंभ किया। पिछले दिनों इसी कैंपेन का राजस्थान के लिए राज्य के राज्यपाल कल्याण सिंह ने शुभारंभ किया था। इसके बाद अब यह कैंपेन गुजरात में शुरू हो गया है। मेरा पेशेंट एप के प्रतिनिधि मनीष मेहता, आलोक खण्डेलवाल और विकास जैन ने इस संबंध में गुजरात राजभवन में राज्यपाल कोहली से मुलाकात की। एप में एक ऐसा बटन दिया गया है, जिसके स्लाइड करते ही मुसीबत में फंसे व्यक्ति की सूचना सैकंड्स में पूरे परिवार को मिल जाती है। राज्यपाल कोहली ने इस एप के द्वारा लोगों की जान बचाने की चलाई जा रही मुहिम को बेहतरीन कदम बताया।
कोहली ने जयपुर टीम को इस एप को बनाए जाने के लिए बधाई दी और कहा कि इसके पीछे लोगों की जान बचाने की मंशा ही लोगों के लिए नई प्रेरणा होनी चाहिए। यदि कोई भी व्यक्ति इसे उपयोग करता है तो सरकार की तरह लोगों की जान बचाने की मुहिम में यह एक भी बेहतरीन काम कर सकता है। राज्यपाल कोहली ने कहा कि किसी भी काम को करने के पीछे यदि मंशा साफ और अच्छी हो तो उसके परिणाम भी खूबसूरत होते हैं। उन्होंने एप बनाने वाले जयपुराइट्स को इसी मंशा पर आगे भी काम करने की सलाह दी और कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए उसका जीवन सबसे कीमती होता है, लेकिन कई बार वह उसके प्रति सजग नहीं रह पाता। वह अपने अधिकारों की बात करता है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी की बात नहीं करता। ऐसे में यह एप खुद के प्रति और दूसरों के प्रति अपनी जिम्मेदारी की शपथ दिलाता है। हम अपनी जिम्मेदारी को समझें और अपनों की जान बचाने की शपथ में सहयोगी बनें।
ऐसे काम करता है यह एप 
यदि आप मुसीबत में हैं तो पूरे परिवार को एक साथ 5 से 10 सैकंड्स में कैसे सूचित करें, इसके लिए ही मेरा पेशेंट एप बनाया गया है। सिटी पॉकेट पब्लिकेशंस की ओर से तैयार किए गए इस एप के संबंध में मनीष मेहता और आलोक खण्डेलवाल ने बताया कि जब भी आप यह फ्री एप डाउनलोड करें, अपने नजदीकी और परिवार के पांच लोगों को इससे कनेक्ट कर लें। इसके बाद जब भी मुसीबत में हों, केवल एक टैब से इसे ओपन करें और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली लाल पट्टी को स्लाइड कर दें। इसके साथ ही तुरंत ही पांचों को लोगों के मोबाइल पर हूटर बजना शुरू हो जाएगा। गूगल लोकेशन पहुंच जाएगी। यदि उनमें से किसी का फोन साइलेंट मोड पर होगा तो भी हूटर के साथ लोकेशन का मैसेज पहुंच जाएगा। यदि आपके फोन में इंटरनेट बंद है तब भी लोकेशन के साथ मैसेज पहुंच जाएगा। यदि पांच में से किसी का फोन स्विच्ड ऑफ है तो जब भी वह उसे ओपन करेगा, हूटर के साथ लोकेशन पहुंच जाएगी। यानी तुंरत ही सूचना मिलते ही मुसीबत में आए व्यक्ति को रेस्क्यू किया जा सकता है और उसे अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। यदि समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो केवल एक्सीडेंट में मरने वाले 70 फीसदी लोगों की जान बचाई जा सकती है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में हर घंटे 17 लोगों की यानी साल में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो रही है। यदि इस एप के जरिए एक व्यक्ति की जान भी रोज बच पाए तो यह महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा कई अन्य परिस्थितियों में लोगों को मुसीबत से बाहर निकाला जा सकता है। घर में अकेली रहने वाली महिलाओं, बड़े बुजुर्गों, कामकाजी महिलाओं, स्टूडेंट्स, बाहर जाने वाली लड़कियों, विदेश से आने वाले पर्यटकों, विदेश में जाने वाले भारतीयों, वाहन चलाने वालों को हर परिस्थितियों में मुसीबत से इस एप के जरिए मदद मिल सकती है। परिवार के लोगों को एेसी मुसीबत में तुरंत सूचना मिलती है तो वे उसकी तुरंत रेस्क्यू सुनिश्चित कर सकते हैं।

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