उपचुनाव 2018: कांग्रेस की वापसी

उपचुनाव 2018: कांग्रेस की वापसी

-अलवर में करण सिंह यादव 1 लाख 96 हजार 496, अजमेर में कांग्रेस के डॉ. रघु शर्मा 84 हजार 414 मतों से और मांडलगढ़ में विवेक धाकड़ ने 12 हजार 976 मतों से जीत दर्ज की

जयपुर। विधानसभा के आमचुनाव से पहले सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा की करारी शिकस्त हुई तथा कांग्रेस ने वापसी की है।

अलवर और अजमेर लोकसभा सीट के साथ मांडलगढ़ विधानसभा पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने तीनों सीटों पर भाजपा को साफ कर दिया। यहां तक की लोकसभा की अजमेर और अलवर सीटों तक बड़े मार्जिन के साथ कांग्रेस ने अपनी वापसी की है।

तीनों सीटों पर नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहे हैं। अलवर में करण सिंह यादव ने भाजपा के डॉ. जसवंत यादव को 1 लाख 96 हजार 496 मतों से, अजमेर में रघु शर्मा ने बीजेपी प्रत्याशी रामस्वरूप लांबा को 84 हजार 162 मतों से और मांडलगढ़ में विवेक धाकड़ ने 12 हजार 976 मतों से जीत हासिल की है। हालांकि खबर लिखे जाने तक लोकसभा उपचुनाव के विजयी प्रत्याशियों की औपचारिक घोषणा नहीं हो पाई थी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद प्रो. सांवर लाल जाट के निधन के बाद अजमेर, भाजपा सांसद चांद नाथ योगी के निधन के बाद अलवर और भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी का निधन होने बाद मांडलगढ़ सीट पर 42 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने अलवर में डॉ. करण सिंह यादव, अजमेर में रघु शर्मा और मांडलगढ़ में विवेक धाकड़ को मैदान में उतारा। वहीं भाजपा ने अलवर में डॉ. जसवंत सिंह यादव, अजमेर में सांवरलाल जाट के पुत्र रामस्वरूप लांबा और मांडलगढ़ में शक्ति सिंह हाड़ा को चुनाव में उतारा था। मांडलगढ़ में तो कांगे्रस के विवेक धाकड़ ने तूफानों से कश्ती निकाली है क्योंकि वहां कांग्रेस के बागी गोपाल मालवीय ने 44 हजार से अधिक मत हासिल किए हैं। यहां कांग्रेस के महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी ने बहुत मेहनत की थी। बताया जा रहा है कि धाकड़ सीपी जोशी की पसन्द के उम्मीदवार थे।

करणसिंह की तैयारी ने काम कर दिखाया
अलवर में डॉ. करण सिंह की सबसे बड़ी जीत हुई है। इसका अनुमान कोई भी नहीं लगा पा रहा था। डा. करण सिंह का टिकट कांग्रेस ने बहुत पहले ही तय कर दिया था और वे अपने प्रचार में जुट भी गए थे। जब तक भाजपा ने अपने उम्मीदवार के रूप में जसवंत सिंह यादव का नाम घोषित किया तब तक करण सिंह यादव आधे से अधिक लोकसभा क्षेत्र को नाप चुके थे। यही कारण रहा कि जब ईवीएम मशीनें खुली तो जसवंत यादव कांग्रेस के करण सिंह यादव को अन्त तक पकड़ ही नहीं पाए और हर राउंड में करण सिंह की बढ़त बढ़ती चली गई।

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