विपक्ष के हौंसले बुलन्द, बचाव की मुद्रा में सरकार

विपक्ष के हौंसले बुलन्द, बचाव की मुद्रा में सरकार

-पहले दिन हंगामी शुरुआत, राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ा हुआ माना
-कांग्रेस का उत्साह दुगना

रोशनलाल शर्मा

जयपुर। राज्य विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को शुरू हो गया। सत्र का पहला दिन ही हंगामेदार रहा। उपचुनाव में तीन सीटें जीतने के बाद कांग्रेसी विधायक बहुत उत्साह में दिखाई दे रहे हैं। वहीं भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाड़ी भी तेवर में दिखाई दिए। कुल जमा बजट सत्र की डगर इस बार आसान नहीं है और पूरा सत्र ही हंगामेदार रहने वाला है।

सुबह 11 बजे राज्यपाल कल्याणसिंह अभिभाषण देने के लिए सदन में पहुंचे और जैसे ही अभिभाषण शुरू किया विधायक हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राज्य में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, दलित आत्महत्या कर रहे हैं। जंगलराज के हालात हैं। थानों में जाने की बजाए लोग गैंगस्टरों के पास जा रहे हैं और अपराधी समानान्तर सरकार चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप हर बार झूठ का पुलिंदा पढ़कर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान का सम्पूर्ण कर्ज माफ किया जाए। उनके सुर में सुर मिलाया कांग्रेस के उपनेता रमेश मीणा ने। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भय का वातावरण बना है, सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। इसी हंगामें के बीच राज्यपाल अपना अभिभाषण पढ़ते रहे। कुछ ही देर बेनीवाल एक कागज पर कर्ज माफी लिखा हुआ लेकर वैल में आ गए। कांग्रेस के मुख्य सचेतक गोविन्द डोटासरा ने कहा कि सरकार को जनता ने 163 सीटें काम करने के लिए दी थी लेकिन पिछले दिनों 17 विधानसभा में हारने के बावजूद सरकार काम करने को तैयार नहीं है। इसी के साथ विपक्षी सदस्य किसानों की कर्ज माफी को लेकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढ़ता देख संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि विपक्षी सदस्यों का ये रवैया गलत है और अभिभाषण को पढ़ा हुआ माना जाए। 11 मिनट के बाद राज्यपाल ने भाषण का अन्तिम पृष्ठ पढ़ा और अभिभाषण समाप्त कर दिया।

संसदीय सचिवों का मामला उठा
आधे घण्टे बाद विधानसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई और जैसे ही पत्रादि सदन के पटल पर रखे जाने लगे कांग्रेस के रमेश मीणा ने संसदीय सचिवों का मामला उठाया लेकिन आसन की तरफ उनकी बात को अंकित नहीं किया गया।

अनर्गल आप और आपकी सरकार हो गई: तिवाड़ी
-काले कानून पर तिवाड़ी का वॉक आउट

दण्ड सहिता कानून को लेकर जब प्रवर समिति का समय बढ़ाने का प्रस्ताव गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने रखा तो भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि ये बिल आर्डिनेंस के जरिए प्रस्तुत किया था और सरकार ने इस आर्डिनेंस को लेप्स करा दिया। अत: रिप्लेस बिल को आप प्रवर समिति को भी नियमानुसार नहीं भेज सकते। सरकार ने इस काले कानून को लेकर हाईकोर्ट में कहा है कि हम इसे पारित नहीं कराएंगे। ये कानून मीसा और डीआरडी की तरह दुरुपयोग के काम आएगा। संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जिसे आप काला कानून बता रहे हैं, वह तब कानून कहलाता जब हम कानून बनाते। कांग्रेस के गोविन्द डोटासरा ने कहा कि आप तो कानून ले आए थे ये तो भला हो मीडिया और विपक्ष का जिसकी वजह से आप कानून नहीं बना पाए। इस बीच राठौड़ ने तिवाड़ी को इंगित करके कहा कि आप अर्नगल बातें मीडिया में कवरेज पाने के लिए बोल रहे हैं। इस पर तिवाड़ी ने कहा कि अर्नगल तो आप और आपकी सरकार हो गई है। राठौड़ ने इसके जवाब कहा कि जिस सरकार को आप अर्नगल बता रहे हो उसका पट्टा लेकर ही आप सांगानेर की गली गली में घूमे हो। दोनों के बीच हल्की नोंकझोंक की नौबत आ गई। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि हम आर्डिनेंस लेकर जो पास नहीं हुआ। सबकी राय ली गई कि इसे ढंग से देख लें इसलिए प्रवर समिति में भेजा था। सदन समाप्ति के 42 दिन में ये समाप्त हो जाता है लेकिन प्रवर समिति अपना काम कर रही है। पुराना कानून लेप्स हो गया, अब जो आएगा वह नया आएगा। प्रवर समिति की राय बनेगी तो सदन में लाएंगे। इस बातचीत के बीच आसन की तरफ से प्रवर समिति का समय बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी कराई गई तो तिवाड़ी सदन से वाक आउट कर गए। इसके बाद दिवंगत सदस्यों और राजनेताओं को शोकाभिव्यक्ति के बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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