प्रतिपस्पद्र्धा: किसान के लिए कौन अधिक चिंतित

प्रतिपस्पद्र्धा: किसान के लिए कौन अधिक चिंतित

रोशनलाल शर्मा
स्वतंत्र पत्रकार

जयपुर। विधानसभा में चौथे दिन प्रश्नकाल के शुरू में ही जबरदस्त हंगामा हो गया। दरअसल किसान के हितों के लिए कांग्रेस अपने आपको सरकार से अधिक संजीदा साबित करने में जुटी है और वह इसमें सफल भी हो रही है। गुरुवार को पहला प्रश्न ही किसानों से संबंधित था। प्रश्नकाल शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने प्रश्न तो पुकार लिया लेकिन अचानक ही उन्होंने व्यवस्था दी कि ये प्रश्न कृषि विभाग ने सहकारिता विभाग को ट्रांसफर कर दिया है और जब सहकारिता विभाग का नम्बर आएगा तब उसका जवाब दिला देंगे। इतना कहने के साथ ही समूचा विपक्ष उखड़ गया।

प्रश्न नन्दकिशोर महरिया का था। जब प्रश्न स्थगित किया तो महरिया उखड़ गए और वे बोले कि ये तो जवाब ही नहीं देना चाहते। उनके पीछे कांग्रेस के मुख्य सचेतक गोविन्दसिंह डोटासरा भी खड़े हो गए और इस पर आपत्ति जताई। उपनेता कांग्रेस रमेश मीणा तो इतने उत्तेजित हो गए कि वैल में आकर धरने पर बैठ गए। अध्यक्ष मेघवाल अपनी व्यवस्था पर अड़े रहे। इतने में ही कांग्रेस के सदस्य वैल में आकर किसानों का कर्ज माफ करो के नारे लगाने लगे। महरिया ने प्रश्नपत्र को फाड़ दिया। विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के साथ कांग्रेसी विधायकों की नोक-झोंक भी हुई। कांग्रेस के सदस्यों ने प्रश्नकाल का वाक आउट कर दिया। कांग्रेस सदस्यों की गैर मौजूदगी में संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने इसकी निंदा की। अध्यक्ष ने भी कहा कि ये लोग इस सदन में रहने लायक नहीं है, अच्छा हुआ ये बाहर चले गए।

कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा का कहना था कि किसानों से संबंधित सवाल को जानबूझकर स्थगित किया जा रहा है और राज्य सरकार किसानों को कोई भी राहत देने की मंशा नहीं रखती है। उधर, सदन से बाहर कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का कहना है कि कांग्रेस के विधायक जानबूझकर भावनात्मक रूप से किसानों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल का पहले सवाल का जवाब 25 अक्टूबर 2017 को ही दिया जा चुका था, इसके चलते किसानों की ऋणमाफी वाले सवाल को स्थगित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर घडिय़ाली आंसू बहा रहे है। अगर कांग्रेस के विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और माकपा नेता अमराराम को इतनी चिंता थी तो केरल के दौरे के दौरान वह अध्ययन करने कमेटी के साथ क्यों नहीं गए। उन्होंने कहा कि अभी बजट सत्र चल रहा है और इसके चलते किसानों की कर्जमाफी को लेकर कोई घोषणा नहीं हो सकती है।

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