भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने वाला कानून खत्म:-मुख्यमंत्री की बजट पर रिप्लाई

भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने वाला कानून खत्म:-मुख्यमंत्री की बजट पर रिप्लाई

विधानसभा संवाददाता

जयपुर। प्रदेश भ्रष्ट अधिकारी अब नहीं बच पाएंगे, क्योंकि सरकार ने उन्हें बचाने वाले कानून को वापस ले लिया है। प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने और मीडिया पर नियंत्रण वाले जिस दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक 2017 के कथित काले कानून को लेकर हल्ला मच रहा था, सरकार ने उसे सेलेक्ट कमेटी से वापस ले लिया है।

सोमवार को राजस्थान विधानसभा में बजट रिप्लाई पर बोलते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इसकी घोषणा की। इस दौरान राजे ने कहा कि जिस अध्यादेश को हमने लैप्स होने दिया और उसके बिल को विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपा गया और वर्तमान में जो कानून बना ही नहीं, फिर भी अब उसे हम सेलेक्ट कमेटी से वापस ले रहे हैं।

इस दौरान सीएम वसुंधरा राजे ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। अपने जवाब के दौरान सीएम राजे ने 70 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि जब देश में आपातकाल लगाया गया था, तब कांग्रेस ने उसके लिए देश से मांफी क्यों नहीं मांगी। राजे ने कहा कि तब एक व्यक्ति को सत्ता में बनाए रखने के लिए कई लोगों को गिरफ्तार कर यातनाएं दी गई। उस समय एक ही व्यक्ति को देश का पर्याय मान लिया गया। राजे ने इस दौरान मीसाबंदियों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें यह मीसबंदी कहते हैं वो लोकतंत्र रक्षा के सेनानियों को मिलने वाली पेंशन बंद कर दी, वो क्या जानें इमरजेंसी का दर्द।

भाजपा विधायक भी विधेयक के विरोध में थे

सरकार के ही दो वरिष्ठ विधायक सोमवार को विवादित विधेयकों के विरोध में खड़े हो गए। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक घनश्याम तिवाड़ी और नरपत सिंह राजवी विधानसभा में पिछले साल भी सरकार की खिलाफत करते नजर आए। भाजपा के इन दोनों विधायकों ने विधानसभा में दण्ड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक और दण्ड प्रक्रिया संहिता राजस्थान संशोधन विधेयक का विरोध जताया। एक तरफ जहां इन विधेयकों को लेकर कांग्रेस ने जमकर विरोध किया और सदन से बहिर्गमन किया वहीं भाजपा के विधायक तिवाड़ी ने इस मामले में व्यवस्था का प्रश्न उठाया और दो बार सदन से वॉक आउट किया था।

नाबालिग से दुष्कर्म पर अब फांसी

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बजट पर हुई बहस के बाद सरकार की तरफ से जवाब के दौरान एक बड़ी घोषणा की है। प्रदेश में अब नाबालिग से दुष्कर्म करने पर फांसी की सजा होगी। इस ऐलान के साथ मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान दूसरा ऐसा प्रदेश हो गया जो कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने पर फांसी की सजा देगा। सीएम वसुंधरा राजे ने प्रदेश में बढ़ती दुष्कर्म के मामलों को देखते हुए यह निर्णय किया है। राजे ने हालांकि अपने बजट रिप्लाई के दौरान किए इस घोषणा में उम्र की बात नहीं की है। सीएम राजे ने अपने इस ऐलान में सिर्फ नाबालिग शब्द का इस्तेमाल किया है। उम्र को लेकर अभी कुछ साफ नहीं किया है। सीएम राजे इस कानून पर उम्र की सीमा क्या तय करती हैं। यह देखने वाली बात होगी। वैसे माना जा रहा है कि नाबालिग का मतलब 18 वर्ष से कम होगा।

बजरी संकट के लिए गहलोत सरकार को बताया जिम्मेदार

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश में चल रहे बजरी संकट का मुख्य कारण पिछली गहलोत सरकार की गलत नीतियों को बताया है। सदन में बजट पर जवाब देते हुए सीएम राजे ने सदन में हंगामा कर रहे कांग्रेसी विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे आश्चर्य है कि 15 फरवरी को इन्होंने बजरी को लेकर सदन में हंगामा किया जबकि बजरी खनन कानून में बदलाव भी पिछली कांग्रेस सरकार में ही हुआ। राजे ने कहा कि पिछली सरकार में कानून में बदलाव कर हजारों स्क्वायर मीटर के खनन पट्टे जारी कर दिए जिसकी पर्यावरण से अनुमति तक नहीं मिली। राजे ने इस दौरान पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 25 नवंबर 2013 को जारी 128 खनन पट्टों व 82 एलओआई को लेकर भी पिछली सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए दाल में काला होने की बात कही। राजे ने कहा कि हम अब बजरी खनन को लेकर नई पॉलिसी बनाकर छोटे छोट खनन पट्टे जारी करेंगे जिससे आमजन को राहत मिल सके।

जवाब में क्या
किसानों के लिए
राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग का स्थाई रूप से गठन करके वैधानिक दर्जा देने के लिए कानून लाया जायेगा, ताकि आयोग को पूर्ण रूप से कानूनी संरक्षण प्राप्त हो सके।

किसानों की कर्ज माफी के संबंध में एक उच्च स्तरीय अन्तर्विभागीय कमेटी बनाई जाएगी।

वर्तमान में श्रीगंगानगर के काश्तकारों को गेट एरिया एवं आउट गेट एरिया के आधार पर गन्ने की क्रय दरों का भुगतान किया जा रहा है, यह वर्गीकरण समाप्त किया जाएगा।

पड़ौसी राज्यों में प्रचलित दरों और गन्ना उत्पादक किसानों की मांग को देखते हुए वर्ष 2017-18 के लिए अगेति, मध्यम एवं पचेति श्रेणी के गन्ने के लिए क्रमश: 310, 300 एवं 295 रुपये प्रति क्विंटल की क्रय दर के अनुसार गन्ना किसानों को भुगतान किया जाएगा।

वर्तमान सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों की 50 हजार रुपए तक एकबारीय कर्ज माफी की घोषणा की है, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुई है।

वर्ष 2008 की कर्ज माफी में भी सहकारी क्षेत्र में मात्र 4 लाख 91 हजार किसानों का 868 करोड़ रुपये का कर्ज माफ हुआ, जबकि वर्तमान सरकार की कर्ज माफी की घोषणा से 20 लाख से भी अधिक किसानों का 8 से 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ होगा और उन्हें राहत मिलेगी।

वर्तमान सरकार की कर्ज माफी की घोषणा से 70 प्रतिशत से अधिक ऋणी किसान लाभान्वित होंगे। पिछली सरकार ने 5 साल में केवल 25 हजार करोड़ का फसली ऋण दिया, जबकि वर्तमान सरकार ने अब तक करीब 62 हजार करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराया है जो वर्ष 2018-19 की समाप्ति तक 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगा।
पिछली सरकार के समय सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा 12.10 प्रतिशत की दर पर कृषि ऋण दिया जाता था, जिसे वर्तमान सरकार ने ही घटाकर पहले 7.10 प्रतिशत किया और अब एक जनवरी, 2018 से इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका फायदा लाखों किसानों को मिलेगा।

ब्याज मुक्त फसली ऋण लेने वाले सभी 25 लाख किसानों को सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा से जोड़ा गया है। वर्तमान सरकार ने बीमा कवर 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 6 लाख रुपए किया था, जिसे अगले वित्तीय वर्ष से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किया जाएगा।

वर्तमान सरकार ने अलग-अलग मदों में किसानों को कुल 38 हजार करोड़ का अनुदान दिया है। इसका फायदा लाखों किसान परिवारों को मिला है।

कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में 8 हजार 226.43 करोड़ का प्रावधान इस बजट में किया गया है, जो वर्ष 2012-13 के 3 हजार 50 करोड़ की तुलना में करीब तीन गुना है।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में किसानों के लिए विद्युत दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, विद्युत नियामक आयोग ने जो राशि बढ़ाई उससे आने वाला करीब 28 हजार करोड़ रुपए का भार सरकार ने क्रॉस सब्सिडी के माध्यम से अपने ऊपर ले लिया।

नई घोषणाएं

बजट मेें घोषित 500 आरओ प्लांट के अतिरिक्त फ्लोराइड प्रभावित 500 बसावटों में सौर ऊर्जा आधारित डि-फ्लोराइडेशन यूनिट्स की स्थापना की जायेगी।
कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों को नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोग मुक्त होने पर उनकी मासिक पेंशन दुगनी कर 1 हजार 500 रुपये की जायेगी।
कांस्टेबलों के पदोन्नति अवसर बढ़ाने के लिए 6 हजार हैड कांस्टेबल के अतिरिक्त पद सृजित किये जायेंगे तथा 18 वर्ष से अधिक की सेवा वाले कांस्टेबलों को स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पदोन्नत किया जा सकेगा।
2 हजार 500 नये होमगार्ड जवानों की भर्ती।
जेल प्रहरियों के 686 पदों पर भर्ती।
राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से संविदा पर लिये गये भूतपूर्व सैनिकों की संविदा दरों में अगले वित्तीय वर्ष से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

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