सदन से लेकर सड़क तक किसान!

सदन से लेकर सड़क तक किसान!

महापड़ाव के लिए आ रहे किसानों को रोका, सीकर हाईवे रींगस पर जाम

जयपुर। सदन से लेकर सड़क तक शुक्रवार को किसानों का बोलबाला रहा। विधानसभा के घेराव और महापड़ाव के लिए जयपुर आ रहे किसानों को पुलिस ने जयपुर में घुसने नहीं दिया। विभिन्न स्थानों पर दो हजार से अधिक किसानों को पुलिस ने रोक लिया और जयपुर में प्रवेश करने नहीं दिया गया। 179 किसानों को पुलिस ने विभिन्न जिलों में गिरफ्तार किया है। उधर, सीकर हाईवे पर जयपुर आ रहे किसानों ने पड़ाव डाल दिया और हाईवे जाम कर दिया।

मामला सदन में भी उठा। कांग्रेस के मुख्य सचेतक गोविन्द डोटासरा ने शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आ रहे किसानों की गिरफ्तारी क्यों की गई। इस पर गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने विधानसभा में बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत किसानों को जयपुर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।
किसानों ने महापड़ाव के लिए स्थान, तारीख और समय की जानकारी नहीं दी थी। इस वजह से हाईकोर्ट के आदेश की पालना में सरकार को यह कदम उठाने पड़े। कटारिया ने कहा कि चौमूं, कालाडेरा सहित जयपुर से सटे अन्य जिलों में भी पुलिस ने किसानों को जयपुर आने से रोका है। जिन 179 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें से 17 जमानत पर छोड़ दिए गए हैं। जयपुर से सटे इलाकों में 2,000 से ज्यादा किसानों को रोका गया। पुलिस ने 50 वाहन भी जप्त किए हैं। किसानों को समझाया जा रहा है कि वे जयपुर की तरफ कूच ना करें और मौजूदा स्थान पर ही अपनी सभा करके घरों को लौट जाएं। कटारिया ने कहा, फिलहाल किसी भी किसान के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि शून्य काल में कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने किसानों के आंदोलन को लेकर विधानसभा में मुद्दा उठाया। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों में बहस भी हुई।

क्या कहा कटारिया ने

कटारिया ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत किसानों को जयपुर महानगर क्षेत्र में महापड़ाव के लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई है। उच्च न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन संख्या 8419/16 में 4 जुलाई 2017 को जारी अंतरिम आदेश के तहत प्रशासन को जयपुर महानगर क्षेत्र में कार्य दिवसों के दौरान घनी आबादी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस, विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाना सुनिश्चित करने के लिए पाबंद किया गया था। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा 8 दिसम्बर 2017 को संशोधन आदेश में अपवाद स्वरूप राजनैतिक एवं अन्य रैलियों के लिए दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक छूट प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि 17 फरवरी 2017 को अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा महापड़ाव हेतु अनुमति के लिए आवेदन किया गया, जिसमें समय-सीमा एवं स्थान का कोई उल्लेख नहीं था। चूंकि महापडाव इस सीमित घण्टों की अवधि में संभव नहीं हो सकता, अत: इसके लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई। गृहमंत्री ने कहा कि 20 फरवरी को महापड़ाव के लिए आने वाले लोगों की समझाइश भी की गई थी।

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