बजरी खनन को लेकर प्रदेश को कोई राहत नहीं, अगली सुनवाई 13 मार्च को

बजरी खनन को लेकर प्रदेश को कोई राहत नहीं, अगली सुनवाई 13 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को लगाई फटकार, राजस्थान सरकार को भी देना है जवाब

नई दिल्ली। प्रदेश में बजरी खनन के मामले पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 19 खानों का एनवायरमेंट क्लियरेंस सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया। अपने हलफनामे में पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि इन खानों का अध्ययन पूरा हो चुका है लेकिन दूसरे पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें इसकी प्रति एडवांस में नहीं सौंपी गई है। तब कोर्ट के निर्देश पर सभी पक्षकारों को इसकी प्रति मुहैया कराई गई। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को इसका जवाब देने का निर्देश दिया है। वहीं कोर्ट ने अगले आदेश तक बजरी खनन के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा है।

सुनवाई के दौरान एक पक्षकार दस्तक की तरफ से वकील सुरेंद्र सिंह हुड्डा ने खेती की जमीन पर अल्प समय के लिए बजरी खनन की अनुमति देने के राजस्थान सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग की। दस्तक ने कहा है केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बाकी राज्यों में कहा है खेती योग्य भूमि से अगर बजरी निकाल ली जाएगी तो जमीन के नीचे के पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिया है ।

16 नवंबर 2017 सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी। बजरी खान मालिकों की आठ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि बिना पर्यावरण मंजूरी के बजरी खनन नहीं की जा सकती है। पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी के बाद ही खनन संभव है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राजस्थान में बजरी या बालू के खनन को लेकर जो कुछ भी हो रहा है वह भयावह है। अगर सालों से नहीं तो महीनों से बिना एनवायरमेंट क्लियरेंस या बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के 82 लीजधारकों द्वारा अंधाधुंध खनन हो रहा है। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को भी बेपरवाह बताया। कोर्ट ने कहा था कि ये भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकार खनन करने वालों के साथ मिली हुई है और बजरी खनन की खुली छुट मिली हुई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब तक राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव इन आरोपों के बारे में हलफनामा नहीं देते खनन को रोक दिया जाए।

कोर्ट ने राजस्थान सरकार को आदेश दिया है कि बजरी खनन पर रोक सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बजरी लीजों को बंद करने का आदेश दिया है। राजस्थान में में बजरी की 82 बड़ी लीजें थीं जो अस्थाई वर्क परमिट पर काम कर रही थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *