दारा सिंह एनकाउंटर में सभी आरोपी बरी

दारा सिंह एनकाउंटर में सभी आरोपी बरी

-11 साल बाद एडीजे-14 कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया

जयपुर। प्रदेश में राजनीति और अपराधियों के बीच गठजोड़ का बहुचर्चित दारा सिंह उर्फ दारिया फर्जी एनकाउंटर केस में मंगलवार को एडीजे-14 कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। प्रदेश की राजनीति और पुलिस में भूचाल लाने वाले इस प्रकरण में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश जोशी ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इससे पहले 23 फरवरी को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

एसओजी ने 23 अक्टूबर, 2006 को जयपुर में दारासिंह का एनकाउंटर किया था। दारा सिंह की पत्नी सुशीला देवी की ओर से इसे फर्जी बताते हुए हत्या करार दिया था। सुशीला देवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। इस पर 23 अप्रैल 2010 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

करीब साढ़े 11 साल 7 महीने पहले मानसरोवर के कमला नेहरू नगर में दारा सिंह एनकाउंटर हुआ था। मामले में मंत्री राजेन्द्र राठौड़, तत्कालीन एडीजी एके जैन सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की। इस मामले में 2011 में आईपीसी अधिकारी अरविंद कुमार जैन और ए.पोनूच्चामी सहित 14 पुलिसवालों को गिरफ्तार किया। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने 194 गवाह, 705 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया।
इनआरोपियों को किया गया बरी

ए.पोनूच्चामी, अरशद अली, नरेश शर्मा, सुभाष गोदारा, राजेश चौधरी, सत्यनारायण गोदारा, जुल्फिकार, अरविंद भारद्वाज, सुरेन्द्र सिंह, निसार खान, सरदार सिंह, बद्रीप्रसाद, जगराम और मुंशीलाल।

राजेंद्र राठौड़ को किया गया गिरफ्तार, 51 दिन जेल में रहने के बाद बरी

सीबीआई ने जांच के बाद भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ के कहने पर दारासिंह को फर्जी मुठभेड़ में मरवाने का आरोप लगाया था। अप्रैल 2012 में सीबीआई ने राजेन्द्र राठौड़ को भी गिरफ्तार कर लिया. लेकिन करीब 51 दिन जेल में रहने के बाद अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। फरवरी 2015 में एडीजी एके जैन को भी हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त किया। वहीं फरारी के दौरान आरोपी विजय चौधरी की मौत हो गई थी।

हाईकोर्ट ने फिर राठौड़ को सरेंडर करने के आदेश दिए

जिला कोर्ट की ओर से राजेन्द्र राठौड़ को आरोप मुक्त करने के बाद सीबीआई और सुशीला देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ याचिका लगाई। इस याचिका के बाद हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया था और ट्रायल कोर्ट को उनके खिलाफ ट्रायल करने को कहा। साथ ही हाईकोर्ट ने राजेन्द्र राठौड़ को सरेंडर करने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सरेंडर करने के बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेन्द्र राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 2012 से ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा रखी है और यह अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रही है।

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