राजस्थानी भाषा के लिए दिल्ली में साहित्यकार देवकिशन ने शुरू किया अनशन

राजस्थानी भाषा के लिए दिल्ली में साहित्यकार देवकिशन ने शुरू किया अनशन

जयपुर। राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिए वरिष्ठ वयोवृद्ध साहित्यकार देवकिशन राजपुरोहित ने सोमवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने 30 जनवरी को अपना आमरण अनशन का नोटिस राज्यपाल, राजस्थान के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री, भारत सरकार को भेजा था. इस नोटिस में उन्होंने 19 मार्च तक राजस्थानी को मान्यता देने का अल्टीमेटम दिया था। ऐसा नहीं होने पर दिल्ली में अनशन की चेतावनी दी थी।

देवकिशन राजपुरोहित ने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा था कि अगर राजस्थानी को मान्यता नहीं मिली तो वे अपने जीवन की आहुति दे देंगे। यदि ऐसा कुछ घटित होता है तो राजस्थान ही नहीं पूरे देश में फैले राजस्थानी समाज द्वारा जो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे धरना प्रदर्शन होंगे, उसकी समस्त जिम्मेदारी केंद्र व प्रदेश सरकार की होगी।

राजपुरोहित ने बताया कि संविधान की मूल आठवीं अनुसूची में केवल 14 भाषाएं सम्मिलित की गई थी. जबकि 1967 में सिंधी भाषा को जोड़ा गया जो कि किसी भी प्रदेश की भाषा नहीं है इसके बाद 1992 में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को सम्मिलित किया गया. वर्ष 2004 में बोडो, डोगरी, संथाली व मैथिली भाषा को शामिल किया गया। इस प्रकार अब संविधान में 22 भाषाएं हैं। केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में एकमात्र राजस्थानी ही शेष है जिसे अब तक मान्यता नहीं मिली है।

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