गहलोत से गुजरात प्रभार वापस लिया, संगठन प्रभारी होंगे

गहलोत से गुजरात प्रभार वापस लिया, संगठन प्रभारी होंगे

जयपुर। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुजरात के प्रभारी की जिम्मेदारी वापस ले ली है। पार्टी की ओर से शुक्रवार को गहलोत के स्थान पर राजीव सातव को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। गहलोत को प्रमोट करके संगठन का प्रभारी महासचिव बनाया गया है।

बता दें कि पिछले साल कांग्रेस ने गुजरात चुनावों से पहले अप्रेल में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एआईसीसी का महासचिव बनाते हुए गुजरात प्रभारी के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। यह नियुक्ति पार्टी के तात्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गुजरात रैली के ठीक एक सप्ताह पहले हुई थी और इसे गुजरात चुनाव के साथ साथ राजस्थान में पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के नजरिए से भी अहम माना गया था। गहलोत को गुजरात की जिम्मेदारी देने के फैसले के बाद पायलट ने ट्विटर पर गहलोत को बधाई भी दी थी।

हालांकि अब राजस्थान विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने गहलोत को गुजरात प्रभार से मुक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस की अंदरुनी सियासत में फिर से उबाल ला दिया है। अब तक पायलट और गहलोत को सीएम के चेहरे के तौर पर पार्टी में ही बिखराव देखा जा रहा था, लेकिन अब यह कसमस और जोर पकड़ सकती है।

गहलोत को और बड़ी जिम्मेदारी

कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को संगठन का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। अशोक गहलोत अब जनार्दन द्विवेदी की जगह लेंगे। कांग्रेस ने राजीव सातव को गुजरात का प्रभारी बनाया है। इसके अलावा राहुल गांधी ने लालजी देसाई को अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल का मुख्य आयोजक नियुक्त किया है, वह महेंद्र जोशी की जगह लेंगे। राजस्थान के 2 बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत का पार्टी में कद बढ़ाए जाने के पीछे गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन को माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव के दौरान वह पार्टी के गुजरात प्रभारी थे।

राजस्थान में सक्रिय होंगे गहलोत

राजस्थान में इसी वर्ष दिसम्बर में आमचुनाव होने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि गुजरात प्रभार से मुक्ति इसलिए ही दी गई है। गहलोत अब राजस्थान में सक्रिय होंगे। संगठन के प्रभारी महासचिव के पास असीमित अधिकार होते हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि गहलोत ही राजस्थान में कांग्रेस का चेहरा हो सकते हैं। हालांकि अब यह तय है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच अब प्रदेश में शीतयुद्ध के हालात और अधिक जोर पकड़ेंगे।

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