आईपीएस इंदु भूषण को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

आईपीएस इंदु भूषण को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

– कई बार रहे हैं विवादों में

जयपुर। 11 दिसंबर 2017 से एपीओ चल रहे 1989 बैच के आईपीएस इंदु भूषण को बुधवार को आखिर राज्य सरकार की अनुशंसा पर एपीओ कर दिया गया है। आईपीएस इंदु भूषण लगातार विवादों में रहे हैं और लगातार विवादों के चलते ही राज्य सरकार ने इस तरह की अनुशंषा केन्द्र को थी जिसे केन्द्र ने स्वीकार करते हुए इंदुभूषण को अनिवार्य सेवानिवृत्ति कर दिया हैं।

दरअसल राज्य सरकार के पास इंदु भूषण के एपीओ करने के अलावा ज्यादा कुछ कर नहीं सकती थी और लगातार इंदु भूषण प्रदेश के पुलिस विभाग की छवि को खराब कर रहे थे। उसके बाद राज्य सरकार ने केन्द्र से उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति करने की सिफारिश की। इसे स्वीकार करते हुए आखिर इंदु भूषण को अनिवार्य सेवानिवृत्ति कर दिया गया है।

इन विवादों के चलते हुए कार्रवाई

इंदु भूषण ने अपने ही अधिकारियों को टारगेट करते हुए 30 अक्टूबर को आरोप लगाया था कि शास्त्रीनगर थाना पुलिस चार साल पुराने मारपीट के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार करने वैशालीनगर स्थित आवास पर पहुंच गई। उस समय उन्होंने आरोप लगाये थे कि उनकी छवि धूमिल करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी करवा सकते हैं।

इंदु भूषण ने उस समय कहा था कि जिन धाराओं के तहत उन पर 4 साल पहले मामला दर्ज किया गया था। उसमें इतनी वक्त बाद गिरफ्तारी हो ही नहीं सकती लेकिन अधिकारियों के दबाव में उनकी छवि को धूमिल करने के लिए इस नियम का भी उल्लंघन किया जा रहा था। जिसके चलते वे कानूनी राहत मिलने तक छुपने को मजबूर हो गए थे। इसके साथ ही उन्होंने तत्कालीन डीजीपी अजीत सिंह का नाम लेते हुए पुलिस महकमें के आला अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे। इसके बाद भी इंदु भूषण के काम में किसी तरह से कमी नहीं आई। पुलिस मुख्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान एडीजी पीके सिंह से पुलिस अधिकारियों की संपत्ति को लेकर भिड़ गए थे।

राज्यपाल के सामने बदतमीजी करना पड़ा सबसे ज्यादा भारी

सितम्बर 2016 में हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से बहस करने के आरोप में उन्हें जबरन अकेडमी से निकाल कर प्लेन से जयपुर भी भेज दिया गया था। उस समय उन पर ट्रेनिंग के बाद शाम को राज्यपाल के साथ ही बदसलूकी करने के आरोप लगे थे। सम्भवत: यही वो सबसे अहम कारण था कि उन्हें सेवाओं से अनिवार्य सेवानिवृत्ति किया गया है।

अपने घर का नाम रखा है हवालात

ये वही आईपीएस अधिकारी है जो ना केवल विवादों के लिए जाने जाते है बल्कि वो अपने आवास के लिए भी जाने जाते हैं। उनके आवास का नाम भी उन्होंने हवालात रखा हुआ है। इसके लिए भी इंदु भूषण का नाम कई बार मीडिया की चर्चा का विषय रहा है।

अनुशासनहीन थे: कटारिया

उदयपुर। भूषण को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के मामले में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि इंदु भूषण अनुशासन में नहीं रहते थे, वे हमेशा लूज टॉक करते थे। ऐसे में मजबूरन उनके खिलाफ रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी पड़ी।

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