परनामी के इस्तीफे के बाद प्रदेशाध्यक्ष तय करने की कवायद तेज

परनामी के इस्तीफे के बाद प्रदेशाध्यक्ष तय करने की कवायद तेज

-आज कोर कमेटी की बैठक में तय होगा नया नाम

-केन्द्रीय अर्जुनराम मेघवाल या गजेन्द्रसिंह में से किसी को मिल सकती है जिम्मेदारी

-जल्द ही कैबिनेट विस्तार, परनामी को किया जाएगा शामिल

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व के इशारे पर अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को दिया है। परनामी ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत व्यस्तताओं के चलते इस्तीफा दे रहे हैं। परनामी को अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है।  प्रदेश में पिछले दिनों हुए तीन उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद से ये तय हो गया था कि इसकी गाज प्रदेश अध्यक्ष पर ही पडऩे वाली है।

परनामी ने यह इस्तीफा 16 अप्रेल को ही सौंपने की बात कही। परनामी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दिया है। परनामी ने कहा कि संगठन अब उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा वह उसे बखूबी निभाएंगे। पत्रकारों से रूबरू होते हुए परनामी ने उपचुनाव में हुई पर बोलते हुए कहा कि भाजपा में जीत और हार दोनों की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। परनामी ने कहा कि वह पार्टी के कार्यकर्ता हैं और हमेशा कार्यकर्ता के रूप में भाजपा को आगे बढ़ाने का काम करते रहेंगे। उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को उन्हें बीजेपी राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य नियुक्त करने के लिए धन्यवाद भी दिया।

गौरतलब है कि परनामी को भाजपा कार्यसमिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। फिलहाल पार्टी की ओर से प्रदेश भाजपा का नया मुख्य किसे बनाया जाता है इस पर ही अब सबकी निगाहें टिकी है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि गुरुवार को भाजपा कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है उसमें राजस्थान के अध्यक्ष का नाम तय होगा। केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल या गजेन्द्रसिंह या राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री अरुण चतुर्वेदी में से किसी को जिम्मेदारी दी जाने की चर्चा है।

अभी और होंगे परिवर्तन

परनामी से इस्तीफा लेने के बाद कई अन्य पदाधिकारियों की भी छुट्टी हो सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी संगनात्मक कई बदलाव कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का इस्तीफा इस बदलाव की शुरूआत है। माना जा रहा है कि पार्टी स्तर पर प्रदेश के कई पदाधिकारियों के साथ ही कई जिलों के जिलाध्यक्षों की भी छुट्टी की जा सकती है। इनमें वे जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं, जहां भाजपा को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद खुलकर कार्यकर्ताओं और मुख्यमंकत्री वसुंधरा राजे विरोधी गुट की नाराजगी सामने आई। पार्टी स्तर पर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की गई।

आगामी चुनाव को देख साध रहे रणनीति

राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों ने रणनीति साधना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो इसी के तहत परनामी से इस्तीफा लिया गया है। प्रदेश में इस पद पर भाजपा जातीय समीकरण को साधते हुए नए अध्यक्ष को नियुक्त कर सकती है। उपचुनाव के दौरान परंपरागत वोटर रहे ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत समाज की नाराजगी को भाजपा की हार का प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब इन समाजों को पार्टी के साथ फिर से जोडऩे की रणनीति तैयार की जा रही है। ऐसे में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी पर गाज गिरी है।

अब कैबिनेट विस्तार की भी चर्चा

परनामी के इस्तीफे के बाद अब प्रदेश में मंत्रिमण्डल विस्तार की भी चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे इसी माह अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगी जिसमें परनामी को भी शामिल किया जाएगा।

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