अब खबर विस्तार से: आसाराम को आजीवन कारावास, 2 सहयोगियों को 20 साल जेल

अब खबर विस्तार से: आसाराम को आजीवन कारावास, 2 सहयोगियों को 20 साल जेल

-पॉक्सो एक्ट के तहत पहला ऐतिहासिक फैसला

-सजा सुनते ही फूटी रूलाई

जोधपुर। नाबालिग शिष्या से दुष्कर्म के मामले में आसाराम (78) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे मृत्यु तक जेल में रहना होगा। साथ ही उसके दो सहयोगियों शिल्पी और शरतचंद्र को भी 20-20 साल जेल की सजा हुई। कोर्ट रूम में सजा सुनकर आसाराम पहले रोने लगा। फिर कहा, ‘जैसी ऊपर वाले की मर्जी। हम यहीं रहेंगे।Ó इससे पहले विशेष एससी-एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने बुधवार सुबह सेंट्रल जेल में कोर्ट लगाकर इन्हें दोषी करार दिया था। इंदिरा गांधी के हत्यारों, आतंकी अजमल आमिर कसाब और डेरा प्रमुख गुरमीत राम-रहीम के केस के बाद ये देश का चौथा ऐसा बड़ा मामला है, जब जेल में कोर्ट लगी और वहीं से फैसला सुनाया गया। पॉक्सो एक्ट के तहत भी ये पहला बड़ा फैसला है।

जहां लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होती है, उसका अपराध ज्यादा गंभीर माना जाता है। ऐसा ही राम रहीम के केस में भी हुआ था। उस केस में जज ने कहा था- जिसने अपनी साध्वियों को ही नहीं छोड़ा और जो जंगली जानवर की तरह पेश आया, वह किसी रहम का हकदार नहीं है। मामला नाबालिग से दुष्कर्म का था। जिसके संरक्षण में नाबालिग रहता है, वही उसका शोषण करे तो अपराध और भी संगीन माना जाता है। पॉक्सो एक्ट 2012 में नाबालिग की उम्र 16 से 18 हो गई, पीडि़ता 17वें साल में थी। इसलिए 2013 में दर्ज आसाराम के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत ही धाराएं लगीं। द क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट 2013 में दुष्कर्म की परिभाषा बदल गई, इसलिए 376 लगी।

अब हाईकोर्ट में हो सकती है अपील

पॉक्सो एक्ट के तहत बनाई गई कोर्ट जिला और सेशन कोर्ट स्तर की होती है। ऐसे में अब फैसले और सजा के खिलाफ अपील सीधे हाईकोर्ट में होगी। आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने कहा कि हम अपनी कानूनी टीम से सलाह लेंगे। इसके बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

दबाव आया लेकिन पीडि़ता टिकी रही बयानों पर

दुष्कर्म की शिकार लड़की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली है। आसाराम के समर्थकों ने उसे और उसके परिवार को बयान बदलने के लिए बार-बार धमकाया। उत्तर प्रदेश से बार-बार जोधपुर आकर केस लडऩे के लिए उसके पिता को ट्रक तक बेचने पड़े। आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले नौ लोगों पर हमला हुआ। तीन गवाहों की हत्या तक हुई। जान गंवाने वालों में लड़की के परिवार के करीबी दोस्त भी थे। कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिशें हुईं। जांच अधिकारी को बचाव पक्ष के वकीलों ने बार-बार कोर्ट में बुलवाया। एक गवाह को 104 बार बुलाया गया। आसाराम की तरफ से लड़की पर अपमानजनक आरोप लगाए गए। ये तक कहा गया कि मानसिक बीमारी के चलते लड़की की पुरुषों से अकेले मिलने की इच्छा होती है। फिर भी 27 दिन की लगातार जिरह के दौरान पीडि़ता अपने बयान पर कायम रही। उसने 94 पन्नों में अपना बयान दर्ज कराया।

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