इलाज के बहाने शिष्या से की थी ज्यादती

इलाज के बहाने शिष्या से की थी ज्यादती

जयपुर। आसाराम के गुरुकुल में पढऩे वाली शिष्या ने अपने बयान में कहा था, ‘मुझे दौरे पड़ते थे। गुरुकुल की एक शिक्षिका ने मेरे माता-पिता से कहा कि आसाराम से इलाज कराएं। आसाराम ने मुझे जोधपुर के पास मणाई गांव के फार्म हाउस में लाने को कहा। वहां पहुंचे तो मेरे माता-पिता को बाहर रोक दिया गया।Ó ‘उनसे कहा गया कि आसाराम विशेष तरीके से मेरा अकेले में इलाज करेंगे। इसके बाद मुझे एक कमरे में भेज दिया गया। वहां पर आसाराम पहले से मौजूद था। उसने मेरे साथ अश्लील हरकतें की। साथ ही धमकी दी कि यदि मैं चिल्लाई तो कमरे से बाहर बैठे उसके माता-पिता को मार दिया जाएगा। मुझे ओरल सेक्स करने को कहा गया, लेकिन मैंने मना कर दिया।Ó

पिता ने कहा- हमें इंसाफ मिला

फैसले के बाद पीडि़त लड़की के पिता ने कहा कि हमें इंसाफ मिल गया। जिन्होंने हमारी इस लड़ाई में मदद की, उनका शुक्रिया।
नजीर बनेगा फैसला

2012 में बने पॉक्सो एक्ट और 2013 में द क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट प्रभाव में आने के बाद ही आसाराम के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ आईपीसी की 376, 376(2)(द्घ), 376(स्र) और पॉक्सो एक्ट की 5(द्घ)(द्द)/6 व 7/8 धाराएं भी इन नए बदलावों के तहत लगी थी। ऐसे में इस केस में जो भी फैसला होगा, वह देश की न्यायिक और पुलिस अकादमियों में पढ़ाया जाएगा।

आसाराम के दो साथी भी दोषी करार

आसाराम के सेवादार शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल की सजा हुई। इन दोनों ने लड़की को आसाराम तक पहुंचाने में मदद की थी। वे गिरोह बना कर दुष्कर्म करने की धारा 376डी के तहत दोषी साबित हुए। कोर्ट ने सेवादार शिवा और रसोइया प्रकाश को बरी कर दिया।

सजा सुनते ही बिगड़ी तबीयत, जेल में बुलाई एंबुलेंस

फैसला आते ही आसाराम की तबीयत बिगड़ गई। जिसके चलते जेल में एंबुलेंस बुलाई गई है। हालांकि आसाराम के स्वास्थ्य को लेकर जेल प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं आया है। कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद आसाराम की आंखें नम हो गई उनमें निराशा फैल गई।

चेहरे पर साफ दिखा तनाव

कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने से पहले ही आसाराम के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। सूत्रों ने बताया कि आमदिनों की तुलना में आसाराम सुबह जल्दी उठा। उसके चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसे सजा का भय बना हुआ था । सुबह उठकर उसने करीब 15 मिनट तक पूजा अर्चना की। बाद में कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद आसाराम मायूस हो उठा।

जेल में कैदी नंबर 130 होगी आसाराम की नई पहचान

जब तक आसाराम दोषी सिद्ध नहीं हुए थे तब तक उनका लिबास संतो वाला था, अब कैदियों वाला होगा। आसाराम की नई पहचान अब कैदी नंबर 130 होगी। आसाराम पिछले 56 महीने यानि करीब 5 साल से न्यायिक हिरासत में थे और दुष्कर्म और यौन उत्पीडऩ की विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिए जाने के बाद ताउम्र जेल में बिताएंगे।

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