भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रकरण: मुख्यमंत्री की अमित शाह से मुलाकात

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रकरण: मुख्यमंत्री की अमित शाह से मुलाकात

-रखा पक्ष, कहा: सत्ता के दो केन्द्र बने तो चुनावों में हो सकता है नुकसान

-हाईकमान अब भी गजेन्द्रसिंह के पक्ष में

जयपुर। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर चल रही खींचतान के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे भी दिल्ली पहुंच गई। देर शाम उनकी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। बातचीत का विस्तृत ब्यौरा तो नहीं मिल पाया है लेकिन बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदेश में सत्ता व संगठन के दो अलग-अलग केन्द्र नहीं रखे जाने चाहिए। ऐसा होने पर प्रदेश में पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है। इस बीच दोपहर को जयपुर में यह अफवाह उड़ी की केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष पद पर नियुक्ति दे दी गई हैं। माना जा रहा है कि केन्द्रीय नेतृत्व अब भी शेखावत को अध्यक्ष बनाने पर ही अड़ा हुआ है।
इस बीच इस मुद्दे पर अब प्रदेश भाजपा नेता भी दो खेमों में बटते नजर आ रहे है। नेताओं का एक खेमा सीएम के समर्थन में दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं तो दूसरा इस मामले में दिल्ली से दूरी बनाए हुए है। इधर प्रदेश मुख्यालय में मौजूद प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी को बुलाकर वार्ता की। चतुर्वेदी यहां करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक रूके और इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मौजूदा सियासी हालातों पर चर्चा हुई।

माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर चल रहे सियासी घमासान को लेकर चर्चा हुई। यहां आपको बता दें कि दिल्ली जाने वाले नेताओं में अरूण चतुर्वेदी का नाम शामिल नहीं है। वहीं कुछ विधायक व मंत्री इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। ऐसे में प्रदेश में प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर होने वाली हर छोटी बड़ी घटनाक्रम पर प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर अपनी निगाहें रखे हुए हैं जिससे वो पार्टी शीर्ष नेतृत्व को अवगत करवा रहे हैं। सीएम राजे ने शाह से पहले पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात की।

झगड़ा चुनाव में टिकट वितरण का

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बड़ी मुश्किल से अशोक परनामी को हटाने पर सहमत हुईं थीं। अब वसुंधरा को पता है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष के पद पर विरोधी खेमे का कोई नेता बैठ जाएगा, तो उनके लिए आगामी विधानसभा चुनावों में मुश्किल हो जाएगी क्योंकि टिकट वितरण की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष की होगी। वहीं बीजेपी चुनाव जीतती है तो प्रदेश अध्यक्ष विरोधी खेमे का होने पर वसुंधरा का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस से भी हट सकता है। इसलिए वसुंधरा संगठन में बदलाव अपनी शर्तों पर चाहती हैं।

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