सादगी गहलोत की थी और उत्साह कार्यकर्ताओं का था

सादगी गहलोत की थी और उत्साह कार्यकर्ताओं का था

-poorv मुख्यमंत्री ने मालाएं पहनी और न किसी समारोह में गए

-सुबह से कार्यकर्ताओं की भीड़, सिविल लाइन्स हुई जाम

जयपुर। किसी को भी नेता जनता बनाती है और जनता के दुख दर्द को अपना समझने वाला ही जननेता कहलाता है। ऐसा ही कुछ गुरुवार को पूर्व मुख्यंमत्री अशोक गहलोत ने साबित किया। पूर्व मुख्यमंत्री और एआईसीसी के महासचिव अशोक गहलोत ने गुरुवार को अपना 68वां जन्मदिन बेहद सादगी से मनाया। राज्य में आंधी तूफान से हुई मौतों के बाद गहलोत ने ट्वीटर पर स्पष्ट कर दिया था कि वे जन्मदिन नहीं मनाएंगे, इसके बावजूद उनके चाहने वालों ने सिविल लाइन्स को जाम किए रखा।

अलबत्ता पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत सारे दिन अपने बंगले पर ही रहे और कहीं नहीं गए। जन्मदिन के अवसर पर शहर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए गए रक्तदान शिविरों में गहलोत को पहुंचना था लेकिन वे वहां भी नहीं पहुंचे। गहलोत ने अपने निवास पर रहकर कार्यकर्ताओं और आमजन से सादगी से बधाई ली। अपने निवास पर पही उन्होंने परिंडा अभियान का शुभारम्भ भी किया।

धरे रह गए बुके और मालाएं
गहलोत के निवास पर हजारों की तादाद में लोग बुके, मालाएं और मिठाइयां लेकर सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। गहलोत का जन्मदिन नहीं मनाने का ट्वीट भी उनके प्रशंसकों को नहीं रोक पाया। गहलोत ने विनम्रता के साथ सभी बुके और मालाएं वापिस कर दीं।
सिविल लाइन्स हुई जाम
सुबह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सिविल लाइन्स की तरफ पहुंचना शुरू हो गया था। एक अनुमान के अनुसार पचास हजार से अधिक कार्यकर्ता प्रदेश भर से गहलोत को बधाई देने पहुंचे। देर रात तक ये सिलसिला जारी रहा। गहलोत सुबह साढ़े आठ बजे बंगले में बाहर आए और तब से लेकर ढाई बजे तक लगातार लोगों से मिले और इसके बाद डेढ़ घण्टा रेस्ट करने के बाद फिर ये सिलसिला साढ़े चार बजे से शुरू हो गया जो देर रात करीब नौ बजे तक चला।

ये लोग पहुंचे

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी, कांग्रेस के पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कार्यकर्ता पहुंचे थे।

गिरदावरी की तरह सर्वे कराए सरकार ताकि आपदा प्रभावितों को पूरा फायदा मिल सके
गहलोत ने प्रदेश की वसुंधरा राजे सरकार से आपदा प्रभावितों को तत्काल सहायता देने की मांग की है। गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पीडि़तों को मुख्यमंत्री रिलीफ फंड से भी सहायता दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि राजस्थान में अंधड़ से अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। गहलोत ने आगे कहा कि प्रदेश में जिस तरह से फसलों के नुकसान के बाद गिरदावरी होती है, उसी तरह से आंधी तूफान प्रभावित इलाकों में भी राज्य सरकार गिरदावरी की तरह सर्वे करवाये, ताकि प्रभावितों को फायदा मिल सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि बुधवार की आपदा में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो जाना दुखद है। वहीं, पीडि़त परिवारों को लेकर उन्होंने कहा कि प्रभावितों के दुख का सभी अहसास कर सकते हैं। अब राज्य सरकार को चाहिए कि प्रभावितों को अधिकतम सहायता दे। पूर्व सीएम ने कहा कि आपदा सहायता के दौरान कई बार नॉम्र्स आड़े आ जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को नॉम्र्स से आगे बढ़ते हुए प्रभावितों की सहायता करनी चाहिये।

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