नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें महाराष्ट्र के राज्यपाल: गहलोत

नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें महाराष्ट्र के राज्यपाल: गहलोत

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र में राजनीतिक हालातों को लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के राज्यपाल पर करारा हमला करते हुए राज्यपाल से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगा है।

गहलोत ने मीडिया के सवालों का जिस तरह से जवाब दिया, वह पाठकों के लिए ज्यौं का त्यौं प्रस्तुत है।

सवाल: बीजेपी दावा कर रही है कि हम सरकार बनाएंगे, सुप्रीम कोर्ट की तो वह बात भी नहीं कर रहे हैं वह कह रहे हैं कि हम सरकार बनाएंगे….
जवाब: बना ली है उन्होंने तो अब क्या बनाएंगे, राज्यपाल की भूमिका जो है वह अनफॉर्च्यूनेट है, बाकी तो कोर्ट के अंदर सब ज्यूडिशरी मामला है। देखिए सब ज्यूडिशियरी मामला है और जब ह्यह्वड्ढ द्भह्वस्रद्बष्द्ग हो गया है तो थोड़ा इंतजार कीजिए, 11.30 बजे सुनवाई होने दीजिए उसके बाद में कॉमेंट होंगे। यह मैं कह सकता हूं कि राज्यपाल महाराष्ट्र को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए उनकी भूमिका जो रही है वह बीजेपी से मिलीभगत करके रही है जो अनफॉर्चूनेट है। राज्यपाल की भूमिका जो होती है वह इस प्रकार होती है कि आप कन्वींस हो जाओ उसके बाद में आप पर रिकमंड करो कैबिनेट को, कब तो रिकमेंड किया, कब सुनवाई हुई, कब फैसला हुआ, कब राष्ट्रपति महोदय ने साइन किए और सुबह 5.47 पर राष्ट्रपति शासन हट गया और 8 बजे शपथ हो गई, तो यह जो लुकाछिपी करके जो गेम हुआ है इसको लेकर पूरा देश स्तब्ध रह गया कि हुआ क्या है कल पूरे मुल्क में इस बात की चर्चा रही, यह एक नजीर बन गई है कि यह किस दिशा में मुल्क को ले जाना चाहते हैं और इसलिए मैंने कहा राज्यपाल महोदय को मोरल ग्राउंड पर इस्तीफा देना चाहिए, यह मेरा मानना है।

सवाल: सर जयंत पाटील जो है गवर्नर हाउस पहुंच गए हैं एनसीपी का समर्थन पत्र लेकर…
जवाब: यह तो सब दावे अपने करेंगे, करने ही चाहिए जब मेजॉरिटी इनके पास में है, कांग्रेस एनसीपी शिवसेना के पास में मेजॉरिटी है तो वह तो पहले कह चुके थे बिना इंतजार किए हुए जब मालूम है कि कल दावा पेश करने वाले हैं उसके पहले आपने जो यह गेम प्ले किया है पूरा देश देख रहा है इसलिए मैंने कहा बीजेपी की हरकतें जो है, जो सामने आ रही है उससे इनकी उल्टी गिनती शुरू हो रही है यह मैं कह सकता हूं।

सवाल: गुड गवर्नेंस के अंदर राजस्थान को अव्वल माना गया है, निकाय चुनाव पर भी उसका असर दिखा है…
जवाब: निकाय चुनाव में जीतने की सबको खुशी है, पूरे प्रदेश वासियों को खुशी है क्योंकि एक मैसेज दिया है, मैं फिर बार-बार कहूंगा कि जिस रूप में मेंडेट मिला है उसके लिए हम आभारी है मतदाताओं के भी और जो इस प्रकार से जो माहौल बनाया गया राम मंदिर के नाम पर, धारा 370 के नाम पर जैसे कि अमित शाह जी बोलते हैं 50 साल तक राज करेंगे, इनको बड़ा भ्रम है जनता समझदार है देश की… मंदिर की जगह मंदिर है, 370 की जगह 370 है, राष्ट्रवाद की जगह राष्ट्रवाद है पर देश किस दिशा में जा रहा है कैसे लोकतंत्र कायम रहेगा, कैसे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, कैसे रोजगार मिलना प्रारंभ होंगे अभी नौकरी जा रही है और किस प्रकार ब्लैक मनी का खेल हो रहा है, मैंने कहा कि जो बॉन्ड निकले हैं बॉन्ड यह बहुत बड़ा स्कैंडल है, स्कैंडल है देश का, आजादी के बाद का सबसे बड़ा स्कैंडल यह है 5000 से अधिक यह बॉन्ड किनसे क्या सौदे किए गए, उनके बदले में क्या बॉन्ड लिए गए हैं, क्या छूट दी गई है देश की विदेशी कंपनियों को किसी को नहीं मालूम है इतना बड़ा गेम हुआ है और 90 प्रतिशत से ज्यादा बॉन्ड मिले हैं बीजेपी को मिले हैं उससे वह खेल खेल रहे हैं पूरे देश के अंदर, चुनाव लड़वा रहे है, खर्च कर रहे हैं, हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं, सब कुछ कर रहे हैं और हर जिलों में ऑफिस बना रहे हैं, जमीने ले ले करके, कहां से पैसा आ रहा है? और बाकी पार्टियों को ब्लॉक कर दिया तो फिर डेमोक्रेसी कैसे रहेगी आप सभी पार्टियों के फंडिंग को ब्लॉक कर दो देश के अंदर खाली बीजेपी के पास में बॉन्ड आएंगे। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने इसका विरोध किया, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसका विरोध किया लागू करते वक्त में तब भी लागू किया गया और तो और इसको मनी बिल के रूप में, राज्यसभा में बहस नहीं हो, जो मनी बिल होता है उसकी बहस खाली लोकसभा में होती है तो मनी बिल के रूप में इसको कन्वर्ट कर दिया गया और खाली लोकसभा में पास करवा दिया गया वरना राज्यसभा में बहस होती इसकी, उसकी बजाय लोकसभा में बहस करके उसको पास करवा दिया गया, लागू करवा दिया गया और तों और जो अभी खबर नई नई आई है कल परसो, प्रधानमंत्री के ऑफिस से जब सेक्रेट्री फाइनेंस ने मना कर दिया कि यह संभव नहीं है एक्स्ट्रा डेट देना, चुनाव आ रहे थे कर्नाटका के उसके पहले मना कर दिया कि बार-बार डेट फिक्स है उन्ही डेट में यह बांड जारी होंगे तो लिखित में आया कि प्रधानमंत्री ऑफिस का आदेश है तब जाकर फाइनेंस सेक्रेटरी को और डेट बढ़ानी पड़ी है, एक्स्ट्रा डेट देनी पड़ी है। उससे आप अंदाज कर सकते हो किस रूप में घोटाला देश में चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट में अभी चल रही है पईआईएल, हम उम्मीद करते हैं कि कुछ नतीजे सही आएंगे वहां पर और मेरा मानना है कि अभी जो इस प्रकार की हरकतें की जा रही है सभी क्षेत्रों में अगर रोकी नहीं गई तो देश को भुगतना पड़ेगा, देशवासियों को, प्रदेशवासियों को, नौजवानों को विशेष रुप से छात्रों को समझ जाना चाहिए कि देश किस दिशा में जा रहा है। अगर सही समय पर छात्र और नौजवान नहीं समझे तो कल के भारत का भविष्य उनके कंधों पर है, कल के भारत का भविष्य तो है ही है उनका खुद का भविष्य जुड़ा हुआ है अगर वह नहीं समझे तो बाद में सब लोगों को पश्चाताप करना पड़ेगा फिर कोई इलाज नहीं होगा और मेरा मानना है कि लोकतंत्र खतरे के अंदर है। अब मेरी बात को किस रूप में लोग लेते हैं वह जानते हैं पर मैं मेरे अनुभव से कह सकता हूं कि लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बज गई है, यह तमाम लोग आरएसएस और बीजेपी के लोग उस रूप में बिहेव कर रहे हैं देश के अंदर, सभी संस्थाओं को बर्बाद कर रहे हैं, ज्यूडिशरी खुद दबाव के अंदर है। आप कल्पना करो सीजेआई साहब अभी जो रिटायर हुए हैं क्या नाम था उनका? गोगोई साहब, गोगोई साहब वह व्यक्तित्व है महान व्यक्तित्व है देश के जो चार जज बैठे सुप्रीम कोर्ट के, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा जी का विरोध करने के लिए सारे केसेज दे रहे हैं एक तरफा दे रहे हैं बेंच को और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी उन्होंने देश के इतिहास में पहली बार हुआ है की 4 सुप्रीम कोर्ट जजों को बैठ कर के अपने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का विरोध करना पड़े, ऑन रिकॉर्ड ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ, उनका बैठना ही गलत हो सकता है, बैठ गए उसके बाद में वह सीजेआई खुद बन गए, सीजेआई बनते ही उनका जो रुख है जो मैसेजेज आ रहे हैं देश के अंदर, जिस प्रकार के फैसले उन्होंने किए हैं कार्यवाहियों के अंदर की जो जो आरोप लगाते थे वह पहले दीपक मिश्रा जी पर वही तरीका इन्होंने अपनाया तो उसको लेकर के पूरा देश और पूरा वकील समुदाय, पूरी ज्यूडिशरी आश्चर्यचकित है कि हो क्या रहा है? क्या हुआ है समझ के परे है, क्यों हुआ उनका व्यवहार क्यों बदलाव है समझ के परे है। जिस मुल्क में यह हालत हो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के बारे में लोग कई तरह की बातें, चर्चा करें तो आप सोच सकते हैं कि ज्यूडिशरी कहां जा रही है। इन तमाम हालातों में देश चल रहा है इसलिए मैं समझता हूं कि ऐसे वक्त में मीडिया की भूमिका बहुत बड़ी होती है, जुडिशरी के बाद में मीडिया ऐसा है जो जनता को आगाह कर सकता है, अगर मीडिया दबाव में चल रहा है अगर आप लोगों के मालिक और संपादक, आपके हाथ में कुछ नहीं है आप तो खाली मेहनत कर रहे हो, आप के मालिक और संपादक की कॉन्शियस नहीं जागेगी तो फिर तो भगवान ही मालिक है।

सवाल: मोदी जी ने मन की बात की है पर महाराष्ट्र पर कुछ नहीं बोले…
जवाब: मोदी जी को चाहिए मन की बात के बजाए दिल की बात करें नंबर 1, नंबर दो सर्जिकल स्ट्राइक की बजाय जो उन्होंने फर्जी स्ट्राइक की है यह जो फर्जीवाड़े की स्ट्राइक की है इस पर मोदी जी को ध्यान देना चाहिए उनकी बगैर सहमति के यह संभव नहीं है, वो सर्जिकल स्ट्राइक थी यह फर्जीकल स्ट्राइक है इतना ही फर्क है, यह फर्जीकल स्ट्राइक और वो सर्जिकल स्ट्राइक। सर्जिकल स्ट्राइक का मतलब देश के लिए है और फर्जीकल स्ट्राइक का दुर्भाग्य देश का है।

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