कटारिया गद्दार! जाट निपटाने को तैयार

कटारिया गद्दार! जाट निपटाने को तैयार

-कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे्य के बयान के बाद पूरे प्रदेश में जाट नाराज

-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कर रहे हैं प्रदेश प्रभारी बदलने की मांग

रोशनलाल शर्मा

जयपुर। प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की बात कहने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालचंद कटारिया को गद्दार कहने वाले कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे्य को ये भारी पड़ गया है। जाट समाज ने इसे गंभीरता लेते हुए पांड्ेय के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है और पांड्ेय को प्रदेश प्रभारी के पद से हटाने की मांग कर डाली है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक इसे लेकर बड़ी संख्या में कई जाट संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे हैं और उन्होंने पांड्ेय को राजस्थान से हटाने की मांग की है। कांग्रेस राहुल गांधी से भी मुलाकात का प्रयास किया जा रहा है। खबर लिखे जाने तक राहुल से मुलाकात नहीं हुई थी।

दरअसल लालचंद कटारिया ने प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कराए जाने की मांग करके कांग्रेस की राजनीति में भूचाल खड़ा कर दिया। उसके बाद कई और नेताओं ने भी इस दिशा में बयान जारी किए हैं। प्रदेश प्रभारी पांडे्य ने इस पर तुरन्त ही प्रतिक्रिया जारी करके कटारिया को ‘गद्दारÓ बता दिया था और उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। उनके इस बयान ने प्रदेश में तूल पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि एआईसीसी के संगठन महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इससे खासे नाराज हो गए हैं।

इधर पूरे प्रदेश में कटारिया के कार्यकर्ता और खासकर जाट समाज के लोग कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पांड्ेय के खिलाफ लामबद्ध हो गए और साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से भी खफा हो गए हैं। इन लोगों को लगता है कि पायलट पांड्ेय के इस बयान से सहमत है। पांडे्य के खिलाफ नागौर और डेगाना के अलावा जयपुर जिले से भी कई जाट संगठनों के नेता दिल्ली पहुंचे हुए हैं।

मुख्यमंत्री तो तब कोई बनेगा जब बात बनेगी
-85 सीटें जाट बहुल

कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के लिए जिस तरह की खींचतान चल रही है, उससे सवाल यह उठ रहा है कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस सरकार बना रही है क्योंकि प्रदेश में करीब 85 सीटें ऐसी बताई जाती है जो जाट बहुल सीटें हैं। आज की तारीख में कटारिया को गद्दार बताने के बाद जाट कांग्रेस नेतृत्व से बेहद खफा है। इसी प्रकार करीब 45 सीटें ऐसी हैं जो मीणा बहुल सीटें है। मीणा में कोई ऐसा नेता कांग्रेस के पास नहीं है जो पूरे प्रदेश में मतदाताओं को प्रभावित करता हो। रघुवीर मीणा और महेन्द्रजीत सिंह मालवीय अपनी सीटों से सीमित हैं। ज्यादा हुआ तो अपने जिले तक सीमित हैं। इस प्रकार करीब 130 सीटों का गणित कांग्रेस का वर्तमान परिस्थितियों में तो बैठ नहीं पा रहा है।
कांग्रेस की जाट लीडरशिप में अब कटारिया होते जा रहे सर्वमान्य नेता

कांग्रेस की बड़ी जाट लीडरशिप शीशराम ओला के साथ खत्म हो गई है। कांग्रेस में बलदेवराम मिर्धा, नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, दौलतराम सहारण, कुंभाराम आर्य, शीशराम ओला और मांगीलाल चौधरी तक जाटों की दबंग लीडरशिप थी। अब नारायण सिंह और लालचंद कटारिया दो बड़े नाम बचे हैं। नारायण सिंह अपनी सीट और अपने जिले तक सीमित है लेकिन अब कटारिया जाट समाज में कांग्रेस लीडरशिप के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में कटारिया को गद्दार बताने के बाद खुद अविनाश पांड्ेय बचाव मुद्रा में आ गए हैं और उन्होंने यह कहा है कि उनके कहने का मतलब ये नहीं था। उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है।

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