संस्कृत साहित्य सम्मेलन हीरक जयन्ती त्रिदिवसीय राष्ट्रीय महाधिवेशन का शुभारम्भ

संस्कृत साहित्य सम्मेलन हीरक जयन्ती त्रिदिवसीय राष्ट्रीय महाधिवेशन का शुभारम्भ

संस्कृत भाषा का संवर्धन करना ही हमारी सरकार का लक्ष्य: गहलोत

जयपुर। राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन शाहपुरा बाग, आमेर रोड के तत्वाधान में राजस्थान संस्कृत राष्ट्रीय षोडष महाधिवेशन सम्मेलन का शुभारम्भ प्रात: 7.15 बजे राष्ट्राभ्युदय यज्ञ के साथ शुभारम्भ हुआ। यज्ञाचार्य श्री राम चतुर्वेदी ने राष्ट्र शांति के लिए राष्ट्राभ्युदय यज्ञ करवाया गया। पहाडीबाबा आश्रमपीठाधीश भुनेश्वरानन्द महाराज ने आशीर्वचन दिया।

इस दौरान संस्कृत पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश-प्रदेश के विभिन्न संस्कृत पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकारो ने संस्कृत के उत्थान, संस्कृत संवर्धन के लिए चर्चा की। वैदिक ज्योतिष उपकरण यंत्र एवं वैज्ञानिक संस्कृत चित्र प्रदर्शनी संस्कृत भारती द्वारा लगाई गई।

अपरान्ह् 4 बजे राष्ट्रीय संस्कृत षोडष महाधिवेशन का उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. कर्णसिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, शिक्षाविद् एवं पर्यावरणविद् थे। अध्यक्षता राजस्थान के यशस्वी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की। विशिष्ट अतिथि सभापति सम्मेलन एवं ऊर्जा, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, मुख्य सचेतक, राजस्थान विधानसभा डॉ. महेश जोशी, पूर्व विधायक चौमंू भगवान सहाय सैनी, युवा कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजपाल शर्मा थेे। स्वागताध्यक्ष पूर्व शिक्षामंत्री पं. बृजकिशोर शर्मा थे।

सम्मेलन महामंत्री डॉ. राजकुमार जोशी ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सम्मेलन की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबोधित करते हुये कहा कि संस्कृत ने ही देश की महान परम्पराओं को जन्म दिया, संस्कृत का देश दुनिया में है नाम। हमारी सरकार ने राजस्थान में संस्कृत शिक्षा को बढ़ाने, संस्कृत शिक्षा के संवर्धन के लिए कार्य किया है। राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन के सुझावों को अमल कर संस्कृत शिक्षा के संवर्धन और विकास के लिए कार्य किए जाएंगे। संस्कृत षिक्षा के विकास मे कोई कमी नही आने दी जायेगी। संस्कृत से ही संस्कृति सुरक्षित है।

मुख्य अतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. करण सिंह ने कहा कि व्याकरण उपनिषद चरक सहिंता सुश्रुत पंतजली के योग सूत्र कामसुत्र मे संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। आज शून्य भी संस्कृत की देन है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक संस्कृतज्ञ है। संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है। सभी भाषाओं पर संस्कृत भाषा की छाप पड़ी है। महाधिवेषन को स्वागताध्यक्ष बृजकिशोर शर्मा, सभापति डॉ. बी.डी कल्ला ने भी सबोधित किया। इस अवसर पर सम्मेलन के सौरभ ग्रंथ एवं विद्यापीठ ज्योत्सना ग्रंथ को लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर संस्कृत पत्रकार एवं संस्कृत कवियों का सम्मान किया गया। मुख्य सचेतक राजस्थान विधानसभा डॉ. महेश जोशी ने संस्कृत के विकास के लिए विद्यापीठ के लिए विधायक कोष से 10 लाख रुपए देने की घोषण की।

इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. बनवारीलाल गौड, अध्यक्ष विद्यापीठ संस्थान आशुकवि पं. रामस्वरूप दोतोलिया, देवर्षि कलानाथ शास्त्री, पं. प्यारे मोहन शर्मा, डॉ. राधेश्याम कलावटिया, आर.एस.जैमनी, सुभाष पारसर, सांवरमल शास्त्री, जानकी वल्लभ शर्मा, डॉ. सुभद्रा जोशी, राजेश्वरी भट्ट, प्रख्यात शिक्षाविद्, वरिष्ठ पत्रकार एल.सी. भारतीय आलोक जोशी, संजीव सुरोलिया, बनवारी शर्मा बीकानेर सहित सैकड़ों संस्कृत विद्वान, संस्कृतानुरागी उपस्थित थे।

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