संसदीय लोकतंत्र में बड़ी ताकत होती है -विधान सभा अध्‍यक्ष

जयपुर, 15 सितम्‍बर। राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में बड़ी ताकत होती है। इसके माध्‍यम से समस्‍याओं का निराकरण आसानी से कराया जा सकता है। सदन ऐसा प्‍लेटफार्म है जहां सत्‍तापक्ष और विपक्ष के सदस्‍य अपनी भूमिका का प्रभावशाली ढंग से निर्वहन कर सकते हैं।
विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने बुधवार को राजस्‍थान विधान सभा से वीडियो कॉन्‍फ्रेन्‍स के माध्‍यम से 81वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्‍मेलन में भाग लेते हुए ‘’प्रभावी और सार्थक लोकतंत्र को बढ़ावा देने में विधायिका की भूमिका’’ विषय पर सम्‍बोधन दिया। इस सम्‍मेलन का आयोजन लोक सभा द्वारा किया गया।
डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि सदन में सत्‍तापक्ष व विपक्ष को अपनी भूमिका का प्रभावशाली तरीके से निर्वहन करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि जनप्रतिनिधिगण से क्षेत्र के मतदाताओं को अपेक्षा होती है कि उनके प्रतिनिधि क्षेत्र की समस्‍याओं को सदन में प्रभावशाली तरीके से रखे ताकि समस्‍याओं का निराकरण हो सके।
डॉ. जोशी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में समस्‍याओं को अलग-अलग तरीके से उठाया जा सकता है। जनप्रतिनिधि की यह जिम्‍मेदारी होती है कि वे क्षेत्र की समस्‍याओं की तरफ सरकार का ध्‍यान आकर्षित करें और समस्‍याओं का निदान भी कराने का प्रयास करें। प्रश्‍नकाल, ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव, शून्‍यकाल और विभिन्‍न मुद्दों पर चल रही बहस में समस्‍याओं को प्रभावी तरीके से रखा जा सकता है। इस अवसर पर विधान सभा सचिव श्री प्रमिल कुमार माथुर भी मौजूद थे। (फोटो-1)

विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. जोशी से डॉ. मोमिन मिले

विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी से बुधवार को यहां विधान सभा में असम विधान सभा के उपाध्‍यक्ष डॉ. नूमल मोमिन ने शिष्‍टाचार भेंट की। (फोटो-2)

विधान सभा अध्‍यक्ष ने विचारों के द्वन्‍द् काव्‍य संग्रह का विमोचन किया

विधान सभा के अध्‍यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने बुधवार को यहां विधान सभा में कवि श्री सुनिल माथुर के प्रथम काव्‍य संग्रह विचारों के द्वन्‍द् का विमोचन किया।
विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. जोशी ने श्री माथुर को इस रचनात्‍मक प्रयास के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस काव्‍य ग्रंथ में समय की एक नई पहल से लेकर जीवन के विभिन्‍न प्रसंगों को समाहित करते हुए पच्‍चीस कविताओं का संकलन किया गया है। डॉ. जोशी को कवि श्री माथुर ने बताया कि उन्‍होंने जीवन के विभिन्‍न पड़ावों पर उपजी विचारों की अविकल धारा को सलीके से काव्‍य शैली में प्रस्‍तुत किया है। इस अवसर पर
श्री गौरव माथुर और श्री आकाश माथुर भी मौजूद थे।

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